“हमसफ़र” – लघु हिंदी कथा

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मैं तुम्हारे साथ और नहीं रह सकता

हाँ , तो मुझे भी तुम्हारा साथ कौन सा बर्दाश्त होता है ?

वह तो बस यूं था कि बच्चों को संभालना था वरना मैं कब का यहाँ से जा चुकी होती

अब मुझे तुमसे तलाक चाहिए

हाँ मैं भी यही चाहती हूँ




यह एक और रात थी उन तमाम रातों में से जब अमूमन मिस्टर और मिसेज रॉय के बीच में झगड़ा हो जाया करता थे। लेकिन किसे पता था कि इस दफा हद ही पार हो जाएगी, तलाक का एलान करते हुए मिस्टर रॉय ने बेडरूम के दरवाज़े को बदसलूकी से बंद किया और जाकर लिविंग रूम में सो गए।

मिसेज़ रॉय को तो जैसे इस बात पर यकीन ही नहीं हुआ। वह खुद को संभाल ही रही थी, कि इतने में ही अद्रिका का कॉल आता है। अद्रिका जो इन दोनों की एकलौती बेटी है। आद्रिका की शादी को अभी महज 4 साल ही हुए हैं और वह कॉल पर बेतहाशा रोते हुए कहती है कि –

माँ मुझसे अब यह शादी संभाली नहीं जा रही , मैं और मान इस शादी को अब तोड़ देना चाहते हैं।

और इतना कहते ही अद्रिका आक्रोश में कॉल रख देती है।
मिसेज़ रॉय को ऐसा एहसास होता है कि कोई बहुत बड़ी अनहोनी होने जा रही है।
अगली सुबह होते ही मिसेज़ रॉय, अपने पति मिस्टर रॉय को अद्रिका के कॉल के बारे में बताती हैं और जल्दबाजी में दोनों अद्रिका और मान के घर के लिए रवाना हो जाते हैं। वहाँ पहुंचते ही सब बहुत अजीब से आलम को महसूस करते हैं। मिस्टर और मिसेज़ रॉय, अद्रिका और मान दोनों को समझाने की हर मुमकिन कोशिश करते हैं। वह उन्हें बताते हैं कि शादी का रिश्ता कितना नाजुक है, इसके चलते कितने सारे समझौते करना जरूरी है और यह भी याद दिलाते हैं कि यदि अद्रिका और मान अलग हो गए विवान का क्या होगा? फिर जैसे एक नाउम्मीद हिस्सा घटित होता है। अद्रिका और मान इस रिश्ते को एक और मौका देने के लिए राज़ी हो जाते हैं। मिस्टर रॉय और मिसेज रॉय खुशी से दोनों के सर पर हाथ रखते हैं और घर से रुखसत हो जाते हैं। घर लौटते वक्त अचानक से मिसेज़ रॉय उन सभी बातों को दोहराना शुरु कर देती हैं जो उन्होंने मिलकर अद्रिका और मान से कहीं –




शादी का रिश्ता बहुत नाज़ुक होता है, बहुत से समझौते करने पड़ते हैं और यदि हम अलग हो गए तो आद्रिका का क्या होगा ? यह सब सुनने के साथ ही मिस्टर रॉय प्यार भरी नज़रों से मिसेज़ रॉय की तरफ देखते हैं और कहते हैं कि –

हमें यहीं थम जाना चाहिए , हर एक लम्हे को याद करना चाहिए जो हमने साथ में बिताये। क्या तुम मेरे साथ इस रिश्ते को एक और मौका देने के लिए राज़ी हो ? और तब ही मिसेज़ रॉय की मुस्कुराती हुई आँखें सब कह देती हैं। क्या प्यार को कभी किसी अल्फाज़ पर आश्रित होने की ज़रूरत पड़ी है ? कभी नहीं तो इस दफा ऐसा कैसे होता ? हर बार की तरह इस बार भी प्यार ने सब धुंधला सा कर दिया।

लेखिका:
वैदेही शर्मा


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