हिंदी कहानी – ईमान

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सर्दी का मौसम शुरू होते ही राम ने सोचा क्यों न मैं माता-पिता को बताकर शहर की ओर काम के लिए निकल लू, महंगाई के मारे तो घर का खर्च अच्छे से नहीं चल पाता। पिता जी भी बूढ़े हो चुके हैं, मोची के काम से तो घर का राशन बड़ी मुशकिल से चलता है।

राम ये सोच ही रहा था कि तभी अचानक उसके दोस्त बलवंत का फोन आता है…

बलवंत फ़ोन पर –
“राम तू तैयार है, मैं तैयार हो रहा हूँ !! बस पाँच दस मिनट लगेंगे मुझे तैयार होने में, इतने में बाहर कुछ टकराने की जोर से आवाज़ आती है।  
राम फ़ोन पर बलवंत को टोकते हुए –
बलवंत…बलवंत…सड़क पर घर के सामने जोर ऐक्‌सिडन्‍ट्‌ हो गया है !! पानी लेकर जल्दी पहुँचो…शायद किसी की जान बच जाएँ…!

बलवंत – माँ तुम पानी मुझे पकड़ा दो मैं देखता हूँ…
पानी नीचे रखकर जाकर कार के शीशे तोड़ने लगता है जिसमें दो आदमी बुरी तरह से फंसे होते हैं। ड्राइवर की तो गर्दन शीशे से कट कर अलग ही हो गयी है। इतने में ‘राम’ भी वहाँ पहुँच जाता है…बलवंत और राम दोनों मिलकर किसी तरह बड़ी मुश्किल से कार को तोड़कर तड़फते हुए आदमी को बाहर निकालने में सफल होते हैं।

तभी शाहर का प्रसिद्ध डाक्टर मोटरसाइकिल रोकता है और तड़पते हुए आदमी को देखकर चला जाता है…
राम और बलवंत हैरान होकर डॉक्टर का यह व्यव्हार देखते रह जाते हैं…

बलवंत फ़ोन पे –
” हैलों, एम्बुलेंस भेज देजिए….जहां सड़क पर फलाईओवर 32 की थोड़ी दूरी पर दुर्घटना हो गई है…आप गाड़ी जल्दी भेज दें।
इतने में पुलिस वहाँ पहुँचाती है, भीड़ दूर खड़ी देख रही है उनके नजदीक कोई नहीं जाता..
 
तीसरे दिन के बाद…
दरवाजा खटकता है, एक कोट पैन्ट पहने अधिकारी उसके पिछे तीन अंगरक्षक बड़े प्यार से बलवंत के घर में अंदर आता है और खड़े-खड़े कहता है -“मेरे भाई की गाड़ी थी जिसका ऐक्‌सिडन्‍ट्‌ हो गया है, मेरा भाई तो अब इस दुनिया में नहीं रहा पर वो पीछे कुछ यादें छोड़ गया है। हमारा ड्राइवर भी बहूत अच्छा था…वो भी नहीं रहा।
 
वो आपका बेटा है…जिसने हमारे भाई को कार तोड़कर बाहर निकला ?
यह सवाल बलवंत की माँ से किया गया –
माँ ने कहा – जी हाँ, वो मेरा बेटा है जो हजारों में एक है। इसका बाप देश को शहादत दे गया।
साहब बेटा आज शहर किसी काम से गया है…
यह बात सुनते घर से बाहर की ओर आता वो अधिकारी..राम के घर की ओर बढ़ जाता है।

राम के घर अंदर जाकर उसके पिता को बड़े प्यार से बाहर की ओर एकांत में बुलाता है और कहता है –
मेरे भाई का ऐक्‌सिडन्‍ट्‌ हो गया, तब आपके बच्चे ने उनको बाहर कार से निकाला।

राम के पिता ने कहा –
मेरा बेटा तो गरीबी में पला बड़ा है मैं उसको दुनियां की खुशियाँ नहीं दे सका..लेकिन मेरा बेटा ईमानदारी के काम और समाज सेवा के काम करने में हमेशा आगे रहता है…!!

इतने में अधिकारी राम के पिता को कसम खिलाने लगा की तू अपने बेटे की कसम खाकर बता क्या तेरे बेटे ने मेरे भाई के सोने के महँगे गहने तथा हीरे की अँगूठी चुराई है ? मैं जानता हूँ…तुम्हें उसने बताया जरूर होगा।

राम का पिता सोचते-सोचते कसम नहीं खाता और कहता है –
मेरा तो एक ही बेटा है मुझे उसपर पूरा भरोसा है कि वो यह गंदी हरकत कभी नहीं कर सकता।
क्योंकि मेरी देख-रेख में बड़ा हुआ है वो, कभी चोरी नहीं कर सकता।

वह अधिकारी यह सुनकर वहां से चला जाता है…
कुछ दोनों बाद दोनों दोस्त काम करके शहर से लोटते हैं।
उसके दो चार दिनों बाद फिर वही अधिकारी बलवंत के घर आता है और दोनों दोस्तों को इक्कठे बैठाकर सख्ती से पूछताछ करता है।

मान जा, बता दे !! मेरे भाई के गहने कहाँ हैं….जूठ मत बोलो तुम दोनों।
तुम माँ-बाप की कसम खाकर बोलो…बता दो वरना मैं छोड़ने वाला नहीं हूँ।

फिर वो अधिकारी ये सोचता है की आखिर गहने गए तो….गए कहाँ होंगे….? और वो यही सोचता-सोचता चला जाता है।
राम सोचता है कुछ तो हुआ है ऐसा…ये ऐसे किसी पर..कोई सवाल कैसे खड़ा कर सकता है…!!

पुलिस के सिवा…उन लाशों के पास कोई गया न था।
एक पुलिस वाला खेतों की और क्यों गया और सड़क के किनारे पड़े पानी से हाथ धुआ रहा था…वो उस पागल आदमी से।

लेखक:
संदीप कुमार नर


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