कथा कहानी Hindi Stories – भारतीय हिंदी कहानियां Online Archive

हिंदी कहानी – ऐकल्लता 1947 का जख्म

सुबह हुई आसपास के लोग अपने घरों का सामान बाँधने लगे। जितना उठा सकते थे उतना बांध लिया। करमा, अपनी घरवाली को यह कह रहा था की जब तक सभी चलने के लिए तैयार होगे मैं खेत के कोनें से जाकर दबाए चांदी के सिक्के निकालकर ले आता हूं। दो-सौ के सिक्के होंगे हमारे

ये कैसा अधिकार – हिंदी कहानी

“मधु”, अब गांव में दसवीं कक्षा पास कर के लगभग चार किलोमीटर दूर ग्यारवीं की पढ़ाई शुरु कर दी, मधु के लिए उस स्कूल में सब नए थे। उसके साथ 15 लड़के तथा 12 लड़कियां सहपाठी थे; मधु कक्षा में सबसे ज्यादा होशियार लड़की थी। मधु गवर्नमेंट स्कूल में पढ़ती थी, उसके दो भाई

तीन बेटियां – हिन्दी कहानी

सुबह के 6 बज चुके थे, समय हो चला था दुकान खोलने का। सुखीराम नें अपने किराने की दुकान का शटर खोला; शटर की आवाज़ से वहां आस पास के लोग यह जान जाते थे कि सुखीराम की दुकान खुल गयी है। अभी तड़के दुकान खोली ही थी कि एक लड़के नें सुखीराम को

निर्मला के पैसे – हिंदी कहानी

माँ जी मेरे बैग से किसी ने 4000 रुपये चोरी कर लिए, मेरे कमरे में कोई आया था क्या ? निर्मला नें यह सवाल अपनी सासू माँ से पूछा। सास नें निर्मला के पूछे सवाल पर कोई विशेष रूचि न दिखाई और कहा देखो शायद तुमने ही कहीं रख दिए होंगे वो पैसे। इतना

3 महीने का झूठा प्रेम – हिंदी कहानी

गीता के लिए आज का दिन काफी दुःखदायी था वह सोच रही थी कि विजय ऐसा कैसे कह सकता है। रातभर बिस्तर पर लेटकर वह यही सोचती रही की क्या इतना आसान होता है किसी को यह कह देना कि “अब मैं तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहता” ! पर उसके पति विजय नें गीता

“नया सवेरा” हिंदी कहानी

माँ मैं स्कूल जा रही हूँ, यह कहते हुए रश्मि घर से स्कूल की ओर निकल पड़ी। घर से कुछ दूरी पर ही रश्मि की सहेली सीमा का भी घर था। दोनों साथ ही स्कूल जाया करतीं थीं। हमेशा की तरह आज भी रश्मि ने सीमा को अपने साथ ले लिया। दोनों पक्की सहेलियां

“एक छुपा प्रेम” हिंदी कहानी

बात उन दिनों की है जब हिन्दुस्तान इंटरनेट के क्रांति युग में प्रवेश कर रहा था। करीब सन 2000 के आस-पास भारत के चंद अग्रणी शहरों में इंटरनेट की व्यवस्था उपलब्ध हो चुकी थी। जो युवा युवती उस वक़्त कंप्यूटर शिक्षा से जुड़े हुए थे वे इंटरनेट पर आकर काफी रोमांचित थे और जो

हिंदी कहानी “18 साल एक दिन” भाग-2

नेहा बोली अमित मैं मजाक के मुड में बिलकुल नही हूँ; तभी मास्टर जी आ गये। दोनों की बात लंच में फिर शुरू हुई , अमित नें साफ़-साफ़ कह दिया कि मुझे नहीं पता तुम क्या सोच रही हो पर मुझे लगता है हमें भाग चलना चाहिए। पर मैं यह नहीं जनता कि भागना

हिंदी कहानी “18 साल एक दिन” भाग-1

पुरे 10 साल बाद नेहा अपने पिता के घर वापस आई है अपने पति अमित और अपनी तीन साल की बच्ची के साथ। नेहा के पिता उसे घर मे देख के खुश है लेकिन बस ऊपर से क्योंकि उनकी दो बेटियों मे नेहा सबसे बड़ी थी और पढ़ने लिखने भी हमेशा अव्वल रहती थी।

‘टॉफियां’ एक हिंदी कहानी

‘बचपन’ कितना प्यारा होता है, हमारा बचपन । ना किसी बात की चिंता और ना ही जिम्मेदारी; सिर्फ खिलौनों , खेल तमाशों , चॉक्लेट व् टॉफियों में ही बीत जाया करता है नटखट बचपन। छोटी – छोटी बातों पर खुश होकर फिर रूठ जाना यही तो बचपन की निशानियां हैं । स्कूल से आते