ये कैसा अधिकार – हिंदी कहानी

“मधु”, अब गांव में दसवीं कक्षा पास कर के लगभग चार किलोमीटर दूर ग्यारवीं की पढ़ाई शुरु कर दी, मधु के लिए उस स्कूल में सब नए थे। उसके साथ 15 लड़के तथा 12 लड़कियां सहपाठी थे; मधु कक्षा में सबसे ज्यादा होशियार लड़की थी। मधु गवर्नमेंट स्कूल में पढ़ती थी, उसके दो भाई और एक बहन सीबीएससी बोर्ड इंग्लिश मीडियम में पढ़ते थे। स्कूल से घर जाने के बाद मधु अपने भाई बहन के साथ खूब पढ़ाई करती कक्षा में वह पहला स्थान प्राप्त करती या दूसरा।

“दीपक”, दूसरे गांव का लड़का मधु के साथ पढ़ता था कभी उसको पढ़ाई में मुश्किल आती तो वह मधु से पूछ लेता। मधु एक अमीर घर की लड़की थी लेकिन दीपक मिडिल क्लास का लड़का अमीर ना ज्यादा गरीब, उसके पिता शादियों में डी.जे का काम करते लेकिन जब दीपक को फुर्सत मिलती तो वह पिता के साथ काम करवाता। मधु और दीपक बारवीं कक्षा की पढ़ाई पूरी कर चुके थे ।

दीपक अपनी बहन की शादी करवा चुका था अब दीपक नें बारहवीं कक्षा को पास करके पढ़ाई छोड़ दी। लेकिन मधु दीपक के गांव से आकर गए लड़कियों के कॉलेज में दाखिला ले चुकी थी। दीपक कभी-कभी अपनी बहन के पास भी चला जाता।

एक दिन की बात है……

दीपक ने सोचा की “प्रीति” कितनी सुंदर है मैं उसे चाहता हूँ क्यों ना उसे बता दूं। पढ़ाई के तो मैं प्रश्न पूछ लेता हूं लेकिन मुझे अब जिंदगी का एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना है और उस ने मधु से कहां मधु इस किताब को संभाल कर रखना मै तुम से बाद मे ले जाऊगा। मधु ने जब घर जाकर उसकी किताब खोली जिसमें दीपक ने अपने प्यार का इजहार किया।

अपने घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसने पढ़ाई छोड़ दी। उसकी दुकान के पास जो बस स्टैंड था मधु वहां से बस चढ़ती। वहां से एक दूसरे को मिल लेते। समय बीतता गया मधु और दीपक का प्यार हद से ज्यादा बढ़ गया उधर प्रीति के घर उसके रिश्ते की बात चलने लगी। उसके घर उसका कोई रिश्तेदार आया हुआ था उसके पिता से रिश्ते की बात करने लगा । उसने कहा कि” लड़का स्वीडन में पक्का है, स्वीडन की नागरिकता मिली हुई है, ‘लड़का स्वीडन में अच्छी नौकरी करता है यह तस्वीर मैं उसके साथ लेकर आया हूं”। मधु ने यह सब बातें सुन ली, मधु के पिता से रिश्तेदार ने शादी की बात पक्की कर ली।

मधु अपनी मां के कमरे में सोया करती थी अब पूरी रात नहीं सो पाई, वह कभी दीपक के बारे में सोचती तो कभी दादी के बारे में सोचती। अपने आप से कह रही थी “मैं दादी से बात करूंगी, तो मेरी दादी के आगे क्या इज्जत रहेगी। उसकी दादी को भी शक न हुआ की मेरे अलावा इसका और कोई हो सकता है, दादी भी सोचती मधु मेरे साथ ही पल कर बड़ी हुई है मधु कभी गलत काम नहीं कर सकती, मधु के मन में तो दीपक ही था। मधु बेचैन रहने लगी।

कुछ दिन के बाद उस कॉलेज जाते हुए दीपक ना दिखाई दिया; दीपक की दुकान बंद थी । एक दिन मधु ने दीपक को देखा तो वह भाग कर उससे लिपट गई।मधु ने दीपक को सारी बातें बताई कि मेरी शादी और कहीं तय हो गई है। मधु और दीपक ने घर से भाग जाने का इरादा किया। दीपक सुबह के लगभग 4:00 बजे गांव में मोटरसाइकिल लेकर आया। मधु ने बैग में थोड़े से कपड़े लिए और दीपक के साथ चल दी । दीपक शहर मे बहन और बहनोई के घर मधु को ले गया। उनका काफी अलीशान बंगला था; बहनोई नौकरी करता था। इस तरह दीपक बहनोई के पास रहने लगा।

लगभग एक हफ्ते बाद दोनों ने अपने प्यार को शादी का रूप दे दिया। उन्होंने कोर्ट मैरिज कर ली, उधर मधु के घर पूरी तरह उदासी छा चुकी थी। मधु के घर वालों ने तलाशी तो बहुत की। परन्तु वह मधु को तलाश ना कर पाए। गांव में बहुत सी बातें हो रही थी कोई कह रहा था ” कि मधु जिस लड़के के साथ पढ़ती थी वह उसे भगा कर ले गया, कोई कह रहा था लड़कियों का पैदा होने से कोई डर नहीं है जब अपने माता-पिता को इस तरह कलंकित कर देती हैं फिर लड़कियां पैदा करने से डर लगता है। कोई बोलता कि अब वह बाहर जाकर क्या करेगी, घर में तो इतनी अमीरी थी लगता है, अब बाहर जाकर मजदूरी करेगी। मधु के पिता ने अब पुलिस में शिकायत कर दी। पुलिस को रिपोर्ट में यह बताया गया कि मधु का अपहरण कर लिया गया है जो की उसके साथ लड़का पढ़ता था, उसी न अपहरण किया होगा। पुलिस दीपक के घर गई दीपक के पिता ने कहा, “मेरा बेटा ऐसा नहीं कर सकता, आपको जरूर कोई गलत सूचना मिली है, मुझे अपने लड़के पर पूरा विश्वास है “इतनी भी खोज करने के बाद पुलिस को कुछ ना मिला मामला कुछ ठंडा पड़ गया।

एक दिन दूसरे शहर की चौकी ने दीपक को एक चौराहे से पकड़ लिया। दीपक ने भागने की कोशिश की पर सब व्यर्थ गया। दीपक को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। जज ने बताया यह अपराधी नहीं है क्योंकि इसकी तो कोर्ट मैरिज है जज के सामने दोनों ने साबित कर दिया कि वह पति-पत्नी है। सभी लोगों को पता चला की किसी ने भी किसी का अपहरण नहीं किया है। मधु और दीपक जब कोर्ट के बाहर आए तो उसके पिता ने मधु को कहा “तुम हमारे साथ चलो, हम तेरी शादी इसी से ही करेंगे। लेकिन मधु खामोश थी; दीपक ने कहा, “पिताजी अब हम बड़े हो चुके हैं, हमें अपनी जिंदगी के लिए जीवनसाथी चुनने का अधिकार है”।

दीपक को शहर में अच्छी दुकान तथा घर मिल गया। दीपक के शहर में दुकान दूर-दूर तक मशहूर हो गई; उनकी अलग सी दुनिया बस गई।

  • क्या समाज में जिन्होंने हमारा पालन पोषण किया है उन्हें जख्म देने का “अधिकार”है?
  • क्या जिन्हें सुख-दुख में सहयोग दिया है उन्हें जिंदगी भर के लिए छोड़ देना चाहिए?
  • क्या ऐसा नहीं हो सकता की मां-बाप भी और दो प्यार करने वाले भी खुश रहे?

 

लेखक:
संदीप कुमार नर