भारतीय समाज Indian Society – भारत और समाज Archive

कन्या भ्रूण हत्या – निबंध विचार

कन्या भ्रूण हत्या अर्थात मादा भ्रूण को गर्भ में ही खत्म कर देना। उसकी सांसों का फैसला क्यों उसके जन्म लेने से पहले ही सुना दिया जाता है ? क्या लड़की होना अभिशाप है !! क्यों उसे कोख में ही मार दिया जाता है ? कुछ लोग इस हद तक भी क्रूर होते है

चिंटू चायवाला

चिंटू उम्र 6 वर्ष, शरीर पर धूल-मिट्टी लगाए घर में घुसते हुए माँ…ओ माँ..सुन ना! माँ मुझे भी पढ़ना है, स्कूल जाना है पढ़-लिख कर बड़ा आदमी बनना है। रामवती (चिंटू की माँ) आश्चर्य से चिंटू की ओर देखते हुए!! क्या बोल रहा हैं, कौन बोला तुझको को ये सब, पढ़ना हैं बड़ा आदमी

मुबारक हो लड़की हुई है

नर्स ने बाहर आकर जैसे ही यह खबर सुनाई राजन सहम गया, अनायास ही मुख से निकल पड़ा, हे ईश्वर ! क्यों भेजा इस मासूम को इस दानवी समाज में अपने पास ही सुरक्षित रखते हरि, अपनी बिटिया को।  यह सिर्फ एक घर की बात नहीँ, आज हर एक लड़की के माता-पिता दहशत में

शराब एक जानलेवा नशा

नशा जहर है, मौत है। जी हाँ, नशा मनुष्य को मार देता है, आज स्वयम् की, कल परिवार की, परसों रिश्तों की फिर समाज की और उसके अगले दिन राष्ट्र की मौत। आज हम शराब के नशे से होने वाले नुक्सान और फायदे पर चर्चा कर रहे हैं; नशा सुनिश्चित मौत है। कुछ पल

भारत की अमूल्य लोक कलाएँ

भारत एक ऐसा देश है जहां पर सबसे अधिक लोक कलाओं (Lok Kala) का जन्म हुआ है। यदि हम गौर करें तो हमें बहुत सी ऐसी कलाएँ देखने को मिलेंगी जिनके बारे में हम भारतवासी होने के बावजूद भी नहीं जानते और इन कलाओं का स्वरूप इतना विराट है कि यह किसी तरह के के

रक्षा बंधन : भाई बहन के खूबसूरत रिश्ते का प्रतीक

हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार रक्षा बंधन जिसे राखी भी कहते हैं, बस कुछ ही दिनों की दूरी पर है। सभी बाजारों में इस त्यौहार की रौनक देखने को मिल रही है। अलग अलग तरीके की सुंदर राखियाँ बाज़ार में आ चुकी है, मिठाइयों से बाज़ार भर चुका है। भाइयों के द्वारा बहनों

सरल बनें सहज नहीं

इस बात में कोई संदेह नहीं कि आपको बचपन से ही यह सिखाया होगा कि आपका स्वभाव अत्यधिक सरल होना चाहिए और कई हद तक यह बात सच भी है या फिर यूँं कहें कि यह बात पूर्णतः सत्य है। आप जितना सरल रहेंगे आपका जीवन उतनी ही सरलता से व्यतीत होगा। एक सरल

जब भी बोलें उचित बोलें

संसार में अपने भाव व्यक्त करने का सबसे मूलभूत आधार है संप्रेषण। यह समस्त मानव विकास की आधारशिला है। अमूमन हर शख्स 3 साल की उम्र तक बोलना सीख लेता है। लेकिन कब, कहाँ, कैसे और कितना बोलना है, यह गुण सीखने के लिए उसे सारी उम्र का फ़ासला भी कम पड़ जाता है।

आप क्या बनना चाहते हैं ?

आप क्या बनना चाहते हैं यह सब सम्पूर्ण रूप से आप पर ही निर्भर करता है। कामयाब हो जाना और एक बेहतर इंसान बन पाना दोनों में बहुत फर्क है। अमूमन हर शख्स ही जिंदगी के दायरों को हासिल कर ही लेता है, जो जिंदगी को जिंदगी बनाने के लिए काफी है। एक अच्छी

क्योंकि यह ज़िंदगी है

ज़िंदगी, यह जितना खूबसूरत लफ्ज़ है शायद उतना ही जटिल भी या यूँ कहें कि हम इसे जटिल बनाने पर उतारू होते है, उन परिस्थितियों को उत्पन्न करते हुए जो वास्तव में आधार शून्य हैं; या फिर जिनको भ्रम की आधारशिला प्रदान कर दी गई हो। फिर इस पथ पर साहस, दृढ़ निश्चय और