मुबारक हो लड़की हुई है

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नर्स ने बाहर आकर जैसे ही यह खबर सुनाई राजन सहम गया, अनायास ही मुख से निकल पड़ा, हे ईश्वर ! क्यों भेजा इस मासूम को इस दानवी समाज में अपने पास ही सुरक्षित रखते हरि, अपनी बिटिया को।
 
यह सिर्फ एक घर की बात नहीँ, आज हर एक लड़की के माता-पिता दहशत में हैं, उम्र चाहे जो हो पर हर पल दिल में यही खौफ है की बेटी की रक्षा कौन करेगा ?
 
ऐसे में तो पैदा होते हो मार दिया जाना अच्छा है। कम से कम इतनी पीड़ा तो न होगी बेटी को!! पर भयभीत रहो समाज के दानवों क्योंकि, यदि हर माता पिता तुम्हारे डर से अपनी नवजात बेटी का अंत कर देगें तो यह सृष्टि ही समाप्त हो जायेगी। उसे देवी मानते हो और उसी देवी को लज्जित करते हो, कहाँ गई तुम्हारी मानवता कहाँ गिरवी रख आये हो अपनी आत्मा को।

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बेटियों की सुरक्षा हमारा नैतिक दायित्त्व है

बेटी भी इंसान है फिर उसको इतनी वेदना क्यों ? मैं उन पापी लोगों से ये पूछती हूँ की क्या ऐसा दुष्कर्म करने के बाद अपनी माँ, बहन और बेटी से नजरें मिला पाते हो ? और यह सवाल सिर्फ दुष्कर्म करने वालों से ही नहीं अपितु उन सब पुरुषों से है जो किसी की माँ, बेटी, बहन पर बुरी नज़र रखते हैं। उन पुरूषों से है जो महिला की मजबूरी का फायदा उठाते हैं; उसे शोषित करते हैं।
 
बलात्कार तो हर जगह हो रहा है, राह चलती लड़कियों, महिलाओं का किसी न किसी पुरुष की कुलषित दृष्टि से, तो किसी स्कूल के पुरुष शिक्षक द्वारा किसी बच्ची को पढाने के नाम पर बार-बार स्पर्श करके। कहाँ आ गए हैं हम सारे रिश्ते-नाते, मान-मर्यादा सब को विस्मृत किसलिए कर दिया गया है! सिर्फ उस शरीर को पाने के लिए जिसने जन्म देने की समर्थता प्राप्त की है।
 
होश में आओ! आज जो तुम कर रहे हो कल तुम पर भी वही बीतेगी। जिस प्रकृति का मान तुम छीन रहे हो वही प्रकृति तुमसे एक दिन अपना हर अनुबंध समाप्त कर देगी। प्यासे होने पर नीर तुम्हारी प्यास बुझाने से इनकार कर देगा, धरती तुम्हारा भार नहीं सहन करेगी और न ही अग्नि तुम्हारे इस पापी तन को स्वयं में वीलीन करेगी। तब सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे मृत शरीर को चील कौवे अपना आहार बनाएँगे या हो सकता है वो भी ऐसे नीच कुकर्मी को आहार बनाने से भूखे रह जाना उचित समझें।
 
हर कन्या की एक-एक चीख प्रतिकार लेगी, अपने अपमान का प्रतिशोध लेगी प्रकृति के रूप में। अब भी समय है सम्हल जाओ!! नारी को इतना पीड़ित मत करो की यह धरती फट जाये और समस्त नारी शक्ति को अपने अंदर समा ले। रक्षित करो हर बेटी को हर बहन को, यदि कभी किसी के साथ कुछ गलत किया है तो क्षमा मांगो प्रायश्चित करो अपने पापों का। नारी को एक ऐसा समाज प्राप्त करवाओ की वो निडर सम्मान पूर्वक कहीं भी आ जा सके। उसके मान सम्मान की रक्षा करना सीखो और हर महिला की इज्जत करना सीखो।

सुरक्षित समाज ही बेटी के लिए सबसे बड़ा उपहार है।

लेखिका:
शाम्भवी मिश्रा


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