महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता उनका अधिकार है

आर्थिक स्वतंत्रता एक ऐसी स्वतंत्रता है जिससे व्यक्ति में आत्मविश्वास , आत्मनिर्भरता स्वयं ही आ जाता है और व्यक्ति अपना जीवन अपनी शर्तों पर जीने तथा अपने निर्णय स्वयं लेने में सक्षम होता है फिर चाहे वह लड़का हो या लड़की । आज यंहा मैं सिर्फ महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता के बारे में अपने विचारों को रखना चाहूंगी प्रत्येक व्यक्ति का आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना बहुत जरुरी होता है । जीवन सुख समृद्धि और शांति से आत्मसम्मान के साथ जीने का अधिकार हर मनुष्य को है।

महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता उनका अधिकार है

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में बढ़ती महंगाई जो सिर चढ़ कर बोल रही है जिसका अकेले सामना कर पाना बिल्कुल भी आसान नहीं है। साथ ही भारत एक परुष प्रधान देश है इसीलिए आज भी महिलाओं का नौकरी करना जरुरी नहीं समझा जाता है। महिलाओं की जिंदगी में आने वाले कठिन समय में कई बार महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम ना होने की वजह से दूसरों पर आश्रित होना पड़ता है आखिर क्यों ? क्योंकि जीवन-यापन करने के लिए कागजी लक्ष्मी जिसे हम पैसा कहते हैं उसकी जरुरत होती है; जो उसके पास खुद का नहीं होता है। सरल शब्दों में कहूँ तो महिलाएं ऐसी जिंदगी अर्जित नहीं कर पाती जो उन्हें अपने खर्चों के लिए भुगतान करने में सक्षम बनाती है । भारत में बड़ी संख्या में महिलाएं हाउस वाइफ हैं कई बार शादी से पहले तक तो लडकियां Job करती हैं पर जैसे ही उनकी शादी होती है तो उन्हें अपना काम व् अपनी जॉब छोड़ना पड़ जाता ता है। पर हम यह नहीं सोच पाते की अब उनकी ज़रूरतें और भी अधिक बढ़ गई हैं वर्तमान में यह समझना महत्वपूर्ण है ।

भारत देश में पुरुष और स्त्री के कार्यों को, जिम्मेदारियों को शुरू से ही वर्गीकृत कर ही दिया है । स्त्री जो लक्ष्मी का रूप होती है घर में रह कर गृहस्ती की बाा ग़ डोर संभाले ऐसा माना जाता है; तथा पुरुष घर के बाहर जाकर कमाये व् आर्थिक रूप से जिम्मेदारियों को उठायें। पर यह सही था पुराने जमाने के लिए क्योंकि उस समय का जीवन ही अलग था, समाज अभी विकसित नहीं हुआ था, जरूरतें अलग थीं और सोच भी । इसी सोच के साथ – साथ शिक्षा का अधिकार भी बँट गया था। लड़की को तो सिर्फ घर संभालना है तो वह काम काज सीखे शिक्षा की जरुरत नहीं है; और लड़का जिसे कि बड़े होकर नौकरी या व्यवसाय करना है तो शिक्षा तो जरुरी ही है उसके लिये । पुराने ज़माने से चलती आ रही इस सोच में बदलाव आया लड़कियों को भी शिक्षा का अधिकार मिला आज गृहस्त हों या फिर कामकाजी लगभग हर स्त्री शिक्षित है और पुरुष भी ।

आज लड़कियों को शिक्षा का अधिकार है पर फिर भी उसके मायने अलग हैं। सदियों से बनी हुई सोच अभी भी लोगों पर हावी है; मैं अगर शहरों की बात करूँ तो वंहा फिर भी महिलाओं की स्थिति ठीक है, पर छोटे शहरो में व् गावों में स्थिति आज भी नहीं बदल पाई है। बहुत कम लोग ही होंगे जो अपनी लड़की को यह सोच कर शिक्षा प्रदान कराते हैं कि लड़की पढ़ लिख कर कुछ बने , वह भी अपने पैरों पर खड़ी हो । आज भी लड़कियों को केवल शिक्षा का अधिकार है उन्हें नौकरी करने और कुछ बनने का अधिकार नहीं है।

अब आप बोलोगे की आज लडकियां हर क्षेत्र में कार्यरत है डॉक्टर , इंजीनियर , खेल के क्षेत्र में , राजनीति में आदि हर क्षेत्र में है । मैं भी यही कहती हूँ की हां ऐसा ही है आज लड़कियां लड़कों के साथ कदम से कदम मिला कर हर क्षेत्र में कार्यरत है पर उनकी संख्या पूरे भारत में बहुत कम है। मैं उन लड़कियों की , महिलाओं की बात कर रही हूँ जिनकी आँखों में सपने तो बहुत होते हैं पर उन्हें पूरा करने की आजादी नहीं होती । उड़ान भरने को पंख तो होते हैं पर उड़ने के लिए खुला आसमान नहीं होता । प्रत्येक माता-पिता चाहे वह सक्षम हों या ना हों उनकी कोशिश यही रहती है की लड़का उच्च शिक्षा प्राप्त करे उसे अच्छी से अच्छी नौकरी मिले या किसी उच्च पद का अधिकारी बने । पर मेरा कहना सिर्फ यही है की लड़कियों को भी मौका दीजिये उनकी भी अपनी सोच है उनमे भी कोई ना कोई हुनर छिपा होता है। उन्हें भी ऐसी शिक्षा दिलाएं और उनको प्रोत्साहित करें ताकि वह भी आर्थिक रूप से मजबूत बनें ।

परन्तु सोचने वाली बात यह है कि लड़कियां काम ना भी करें , पैसा ना भी कमायें तो क्या होगा ? उनकी तो शादी करनी है और उनका पति तो कमायेगा ही उनकी जरूरतों को पूरा करेगा; या जिन महिलाओं के पति कमाते है उन्हें खुद नौकरी करने की अथवा पैसा कमाने की क्या जरुरत है।

सदा से ही भारतीय घरो में यह परम्परा रही है की एक आदमी (घर का पुरुष) कमाए और सभी जिम्मेदारियों को उठाये , घर के अन्य लोगों की जरूरतों की पूर्ती करे। यही आज भी हम सोच लेते हैं कि जब घर में पुरुष कमाने वाला है तो स्त्री भी क्यों ? मेरा कहना है क्यों नहीं ! घर सँभालने कि जिम्मेदारी सिर्फ पुरुष पर ही क्यों ? क्यों उसे अकेले ही सबका भार उठाना है ? पहले आमदनी का एक जरियाँ होता था खर्चे सिमित थे और महंगाई भी । पर आज के माहौल में सब कुछ बदल चुका है ; घर की स्त्री अगर सक्षम है तो वह आर्थिक रूप से घर की जिम्मेदारियों को उठाने में पुरुष का साथ क्यों नहीं दे सकती । इससे उसके परिवार का जीवन और भी सरल व् इस महंगाई के समय में आर्थिक रूप से संतुलित बना रहेगा । बहुत सी महिलाओं को अपने जीवन काल में या उनके पति से अलग होने के कारण अकेले अपना जीवन जीना पड़ता है; अकेले अपनी आर्थिक स्थिति को उन्हें संभालना पड़ता है, तब उन्हें जीवन में दिक्क्तों का सामना करना पड़ता है। ऐसी परिस्थिति में महिला शक्तिहीन हो जाती है और अपने परिवार का भरण पोषण करना उसके लिए मुमकिन नहीं हो पता। असहाय स्त्री को फिर यही पुरुष समाज शोषित करने लगता है। इन परिस्थितियों से निपटने का एक मात्र उपाय है लड़कियों की शिक्षा और उनकी आत्मनिर्भरता।

आइये कुछ बिंदुओं पर गौर करते हैं:

आजकल के जीवन में कुछ भी निश्चित नहीं है, चाहे वह नौकरी हो या जीवन । अगर घर में कमाने वाला एक है या अकेला घर का पुरुष ही घर की आर्थिक जिम्मेदारी उठाता है तो ऐसी स्थिति भी आ सकती है की पुरुष को किसी कारणवश नौकरी छोड़नी पड़े या वो कार्य करने में असक्षम हो जाय अथवा मृत्यु का सामना करना पड़े तो घर की आर्थिक स्थिति संकट में आ जाएगी यह अंदाजा लगाना कितना मुश्किल होगा कि वो परिवार अपना भरण पोषण कैसे करे। जिंदगी जीने के लिए पैसा कितना जरूरी है यह मुझे यंहा लिखने की जरुरत नहीं । अगर घर में कमाने के साधन एक से अधिक हों या घर की स्त्री भी आर्थिक रूप से मजबूत हो तो भविष्य में आने वाले कठिन समय में उसकी राह थोड़ी आसान हो जायेगी ।

जैसा हम सभी देख रहें कि दिन-प्रतिदिन महंगाई बढ़ती ही जा रही है और हममे से कौन नहीं चाहता सुख सुविधा से संपन्न जीवन व्यतीत करना। हमारे बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़े व् अच्छी से अच्छी उच्च शिक्षा प्राप्त करें, पर आजकल के इस महंगाई के युग में income कितनी भी हो खर्चे ज्यादा होते हैं और हम सभी का बजट कम पड़ जाता है । ऐसी स्थिति में अकेले पुरुष के लिए सभी जिम्मेदारियों , सुख सुविधाओं की पूर्ति करना थोड़ा मुश्किल और तनावपूर्ण हो जाता है। इसलिए यदि घर की महिलाएं भी आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं तो वे न केवल घर के दैनिक खर्चों में योगदान करेंगी बल्कि परिवार के वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने में भी मदद कर सकती हैं।

आर्थिक रूप से स्वतंत्र लोग अपने निर्णय लेने में सक्षम होते हैं और व्यक्ति को अपने नीजी कार्यो के लिए किसी पर भी निर्भर नहीं रहना पड़ता है। इससे उसका आत्मसम्मान बढ़ता है और जीवन में किसी भी प्रकार की परिस्थितियों का सामना करने के लिए अधिक आत्मविश्वास होता है। एक मनुष्य होने के नाते बहुत सी महिलाओं में कुछ आकांक्षाएं और कुछ उनके अपने सपने होते हैं; लेकिन आर्थिक रूप से अपने माता – पिता या पति पर निर्भर होने के कारण वह इच्छाओं को पूरा नहीं कर पाती हैं । उनका आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना ही उन्हें अपनी इच्छाओं को पूरा करने में सक्षम बनाता है जैसे कि उनकी skill को बढ़ाने के लिए कोई कोर्स करना , अपनी मर्जी की या पसंद की वस्तुओ को खरीदना , अपने निजी खर्चों को खुद उठाने में सक्षम होना इत्यादि ।

हमारे समाज का यह एक दुखद तथ्य है कि आज भी बहुत सी महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं या उन्हें परिवार के सदस्यों द्वारा दबाव में जीना पड़ता है और ऐसे स्थिति में वह स्वयं को असहाय महसूस करती है। क्योंकि वित्तीय रूप से वह अपने परिवारजनों पर निर्भर रहती हैं तथा उन पर होने वाले सभी अन्यायों, अपराधों को सहती रहती हैं । इसलिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हर महिला आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो ताकि वह अपने ऊपर होने वाले अन्याय का डट कर सामना करे और उसे किसी रूप में खुद को असहाय महसूस न करना पड़े ।

जो महिलायें आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं व् अपने पैरों पर खड़ी हैं तथा अपने निर्णय लेने में सक्षम हैं उन महिलाओं को व् उनके विचारों को एक role model के रूप में लिया जाता है। वह समाज में अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन सकती हैं उनका आत्मनिर्भर होना अन्य महिलाओं को भी प्रोत्साहित करेगा ताकि वह अपने सम्मान के लिए और स्वयं पर होने वाले अन्यायों के खिलाफ खुद खड़ी हो सकें । साथ ही आप अपने बच्चों के लिए आत्मनिर्भर बनें क्योंकि बच्चे जो देखते हैं वही सीखते हैं । यदि बच्चे अपनी माँ को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर (financially self dependent) पाएंगे तो वे पैसे के मूल्य को भी समझेंगे और बड़े होकर आत्मनिर्भर होने के लिए भी प्रेरित होंगे।

हमारे देश की ज्यादातर महिलाएं भी कमाती हों या आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हों तो वह देश के लिए एक उपभोक्ता के रूप में योगदान कर पाएंगी। वो भी पैसा खर्च करना शुरू कर देंगी , जिससे देश के सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product (GDP) को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा उनके द्वारा दिया जाने वाला tax सरकार के राजस्व में वृद्धि करेगा और लोगों के कल्याण के लिए इस्तेमाल किया जायेगा । इसके अलावा, अधिक से अधिक लोगों के कामकाजी (working) होने से हमारा देश आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत व् स्वतंत्र हो पायेगा ।

मैं अपने इस लेख के जरिये सिर्फ यह कहना चाहती हूँ की लड़कियां भी आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनें खुद अपने पैरों पर खड़ी हो ताकि वह भी समाज में स्वयं का एक स्थान बना सकें; अपनी पहचान बना सकें । मेरा अनुरोध उनके परिवार जनों से है, बेटियों को हमेशा प्रोत्साहित करें तथा उनका साथ दें; उनको पढ़ाएं , सक्षम बनायें ताकि आर्थिक स्वतंत्रता उन्हें जीवन में आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाये ।

 

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