शराब एक जानलेवा नशा

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नशा जहर है, मौत है।

जी हाँ, नशा मनुष्य को मार देता है, आज स्वयम् की, कल परिवार की, परसों रिश्तों की फिर समाज की और उसके अगले दिन राष्ट्र की मौत। आज हम शराब के नशे से होने वाले नुक्सान और फायदे पर चर्चा कर रहे हैं; नशा सुनिश्चित मौत है। कुछ पल का मजा देना वाला नशा जिंदगी भर के लिए सजा बन सकता हैं। नशा हमारे शरीर, मन एवं मष्तिष्क को नेस्तनाबूत कर देता हैं। अर्थ विहीन, परिवार विहीन, समाज विहीन और शक्तिविहीन बना देता है नशा। शराब का नशा स्वस्थ के लिए बहुत ही हानिकारक सिद्ध होता हैं।

इसका सेवन सिर्फ टी बी, खाँसी ही नहीं बल्कि कैंसर जैसी घातक बीमारी को भी दावत देता है। हर रोज हजारों लोग नशे की लत के कारण मौत की शैया पर सो रहे हैं। नशा कई प्रकार से किया जाता है, पर इनमे भी ‘शराब’ एक सामाजिक बुराई और पारिवारिक क्लेश का एक बड़ा कारण है। शराब समाज के विकास में सर्वाधिक बाधक है। शराब के नशे के कारण परिवार में कलह, अर्थिक तंगी और सामाजिक विघटन हो रहा है। इसके लगातर सेवन से शारीरिक क्षमता में भी गिरावट देखि जा सकती है।

Sharab Ek Janlewa Nasha शराब एक जानलेवा नशा है

जब ऐसा कोई अध्ययन सामने आता है जिसमे कम मात्रा में शराब के सेवन को स्वास्थ के लिए अच्छा बताया गया हो तो हर व्यक्ति इसका बड़े उत्साह से स्वागत करता है। लेकिन कम मात्रा में भी शराब पीने से स्वास्थ को कोई फायदा होता है, ये तय करना बहुत जटिल काम है।

सबूतों के आधार पर दवा देने की प्रक्रिया के जनक माने जाने वाले ‘आर्ची क्रोकेन’ ने एक शुरुआती अध्य्यन में पाया की शराब और स्वास्थ का आपसी रिश्ता है। उन्होंने 18 विकसित देशों में हृदय संबंधी बिमारियों से होने वाली मौत की वजह जानने की कोशिश की थी। क्रोकेन ने अपने विश्लेषण में पाया की शराब के सेवन का सीधा असर हमारे हृदय रोग से है उनके मुताबिक शराब बनने में जिन दूसरे तत्वों का समावेश होता है उनमे मौदूज एंटी ऑक्सीडेंट या फिर पौधों के पालीफेँनाल फायदेमंद होते हैं।

वर्ष 1886 में शोधकर्ताओं के दल ने अमरीक में 50 हजार से ज्यादा पुरुष डॉक्टर्स का सर्वे किया, इसमें उनके खाने-पीने की आदतों, उनके चिकित्सीय इतिहास और स्वास्थ्य की स्तिथि पर दो साल तक नजऱ रखी गई। इस अध्ययन में पाया गया था की जो डॉक्टर्स अल्प मात्रा में शराब पीते थे उनमे कोरोनरी हार्ट बीमारियाँ कम होती हैं।

वर्ष 2000 में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन के मुताबिक अगर आप एक स्टैंडर ड्रिंक लेते हैं, तो सप्ताह में ड्रिंक नहीं लेने वालों की तुलना में आपकी मौत की आशंका कम हो जाती है।

इस अध्य्यन के मुताबिक़ सोच समझकर कम मात्रा में शराब का सेवन करने वालों में हृदय रोग से मरने की सम्भावना उन लोगोँ से कम है जो शराब रोजाना काफी मात्रा में पीते हैं।

शोधकर्ताओं का मानना है की शराब का गुड कॉलेस्ट्रोल और हिमोग्लोबिन ए1 (जो रक्त जमाने में मदद करते हैं) पर असर होगा। इन तीनों कारकों की मेटाबोलिक सिंड्रोम में अहम भूमिका होता है। सम्भवतः इन कारकों में बेहतर संतुलन स्थापित होता होगा। कई लोगों का ऐसा मानना भी है शराब के सेवन से पाचन क्रिया बेहतर होती है। पर इसकी सेवन मात्रा कब औषधि से जहर का रूप ले लेती है ये पता भी नहीं चलता। शुरुआत में दवा के रूप में इसका सेवन शुरू होता है फिर धीरे-धीरे ये अच्छी लगने लगती है और उसके बाद जरूरत बन जाती है। शराब ने अब तक न जाने कितने घरों को कितने लोगोँ को अपने नशे का शिकार बनाया है।

हम आपसे यही निवेदन करते हैं की नशे को लत ना बनने दीजिये। अपने और अपने परिवार के प्रति आपका जो फर्ज बनता है उसे समझिये और एक अच्छे पति, पती और बेटा बनकर दिखाइए।
 
जय हिन्द!

लेखिका:
शाम्भवी मिश्रा


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