Google Ads गूगल ऐड क्या है – Introduction हिंदी में जानिए

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गूगल ऐड कुछ और नहीं बल्कि गूगल कंपनी का ही एक प्रोडक्ट है जिसके माध्यम से हम ऑनलाइन अपने विज्ञापन को दिखा सकते हैं। संछित शब्दों में गूगल ऐड एक एड्वरटाइजिंग प्लेटफार्म है। गूगल ऐड के इस्तेमाल से आप अपनी कंपनी अथवा उसकी सेवाओं का विज्ञापन गूगल सर्च इंजन के अतिरिक्त गूगल के सर्च पार्टनर पर दिखा सकते हैं। अतः Google Ads के द्वारा हम अपना विज्ञापन Google Search Network और Google Display Network दोनों पर ऑनलाइन दिखा सकते हैं।

क्या है गूगल ऐड का इतिहास ?

आपको बताते चलें की Google Ads को पहले Google Adwords के नाम से जाना जाता था। 23 अक्टूबर, सन 2000 में गूगल एडवर्ड्स की शुरुआत की गयी। यह वो दौर था जब भारत में इंटरनेट आम आदमी की पहुँच से बाहर था। अंग्रेज़ कितने दूरदर्शी होते हैं आप इसी से अंदाज़ा लगा सकते हैं की सन 2000 में इंडिया के लोग अभी गूगल सर्च इंजन के बारे में ही ठीक से नहीं जानते थे।

खैर, Google Adwords जिसकी शुरुआत सन 2000 में हुई, वो 24 जुलाई 2018 में Google Ads के नाम से जाना जाने लगा। गूगल कंपनी ने अपने एडवर्ड्स प्रोग्राम को पहले से और ज्यादा बेहतर बनाते हुए, इसमें कई व्यापक बदलाव करते हुए इसका नाम भी परिवर्तित कर दिया।

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क्या हैं गूगल ऐड के फायदे ?

ये हम अच्छी तरह से जानते हैं की Google Search Engine का इस्तेमाल पूरी दुनियां में सर्वाधिक किया जाता है। गूगल सर्च इंजन में सबसे ऊपर रैंकिंग ले पाना बेहद मुश्किल कार्य होता है जिसको करने में महीनों का समय लग जाता है और कई बार कीवर्ड के कम्पटीशन को देखते हुए साल भी लग जाते हैं गूगल सर्च इंजन में टॉप स्थान प्राप्त करने में।

इस समस्या से निजात पाने का केवल एकमात्र तरीका होता है ‘Google Ads’ , जी हां मित्रों; गूगल ऐड का इस्तेमाल करते हुए हम गूगल सर्च इंजन में सबसे ऊपर का स्थान हासिल कर सकते हैं मगर उसके लिए हमें एक निश्चित राशि चुकानी पड़ती है।

मेरे कहने का मतलब आप समझ गए होंगे की Google Ads सिर्फ Paid Advertisement के लिए होता है। सीधे शब्दों में गूगल को पैसे देकर हम Google Search Engine में अपना सबसे ऊपर का स्थान प्राप्त कर सकते हैं।

कैसे काम करता है गूगल ऐड ?

जैसा मैंने आपको बताया, गूगल ऐड एक Paid Advertising Platform है जिसके माध्यम से हम Google Search Networks और Google Partner Networks में अपने विज्ञापन को दिखा सकते हैं। अर्थात यह एक तत्काल क्रिया है; इधर आपने गूगल ऐड में अपना कैंपेन सेट किया और उधर आपको अपना विज्ञापन दिख गया। SEO की तरह यह एक लंबी प्रक्रिया न होकर ‘पैसा फेंक तमाशा देख’ वाली प्रक्रिया है।

गूगल ऐड कुछ इस प्रकार चलता है:

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सीधी सी बात है, अगर आपको अपनी वेबसाइट का ‘ऐड’ गूगल सर्च इंजन, गूगल के अन्य दूसरे नेटवर्क्स, गूगल के पार्टनर नेटवर्क्स पर देना है तो आपको Google Ads का ही इस्तेमाल करना पड़ेगा।

एक नज़र डालते हैं की गूगल नेटवर्क कौन कौन से हैं –

1 – गूगल सर्च इंजन
2 – यूट्यूब सर्च
3 – एंड्राइड एप्प

एक नज़र डालते हैं की गूगल पार्टनर नेटवर्क कौन कौन से हैं –

1 – गूगल सर्च पार्टनर (दूसरे सर्च इंजन जो गूगल सर्च से डेटा लेकर अपने सर्च पेज पर दिखाते हैं)
2 – गूगल एडसेंसे नेटवर्क वेबसाइट (वो वेबसाइट जिनपर गूगल एडसेंसे का ऐड दिखाई देता है)

ध्यान रखें:

Google Ads को मुख्यतः 2 भागों में बांटा गया है –

पहला है – Search Network Advertising
दूसरा है – Display Network Advertising

चलिए जान लेते हैं की गूगल ऐड की खासियत या विशेषता क्या है:

क) – वॉर्ड्सट्रीम के कथन के अनुसार, 100 में 65 लोग गूगल ऐड पर क्लिक करते हैं जब उनको ऑनलाइन कोई आइटम खरीदना होता है।
ख) – गूगल के कथन के अनुसार, गूगल ऐड द्वारा जनरेटेड ट्रैफिक के 100 में से 89 लोग सर्च रिजल्ट के आर्गेनिक लिंक पर क्लिक नहीं करते।
ग) – गूगल कहता है की, गूगल ऐड से आप दोगुना लाभांश प्राप्त कर सकते हैं। अर्थात यदि आप 10 रुपये लगायें तो आप 20 रुपये कमा लेंगे।

यह भी जान लेते हैं की गूगल ऐड का ऑपरेशन मॉडल क्या है:

(1) PPC MODEL
इसे Pay Per Click कहते हैं, जब यूजर आपके ऐड के लिंक पर क्लिक करता है तभी पैसा कटता है।

(2) PPM MODEL
इसे Pay Per 1000 Impression कहते हैं, अगर आपका ऐड 1000 बार सर्च रिजल्ट में दिखाई देता है तब आपका कुछ पैसा कटता है।

** देखिये बात ऐसी है की, ऐड चलाने वाले का भी आपका एक मकसद होता है। अगर विज्ञापन दाता यह चाहता है की यूजर उसके विज्ञापन लिंक पर क्लिक करे तो वह हमेशा PPC की तरफ देखेगा और जितनी बार यूजर उसके विज्ञापन लिंक पर क्लिक करेगा उतनी बार विज्ञापन दाता के खाते से कुछ पैसा कटता जायेगा।

** अब यदि विज्ञापन दाता यह चाहता है की उसके विज्ञापन पर क्लिक न हों बल्कि वो सिर्फ दिखाई दे, तो वह PPM का चुनाव करेगा। अमूमन तौर पर यह चुनाव तब करते हैं जब हमें अपने उत्पाद के संबंध में लीड जनरेट ना करना हो या बेचना ना हो, बल्कि केवल उसके नाम को प्रचारित करना हो।

अंत में,

जैसा आप देख रहे हैं मैंने टाइटल दिया है ‘गूगल ऐड इंट्रोडक्शन’ इसका मतलब साफ़ है केवल गूगल ऐड के बारे में आपको बतलाना। आगे यह कैसे कार्य करता है , कैसे हम इसमें पैसा लगाते हैं , पैसा लगाते समय किन किन बातों का ध्यान रखना होता है और कैसे प्रॉफिट और लॉस होने के चान्सेस होते हैं आदि विषयों पर पूरा लेख लिखेंगे। फिलहाल यह लेख गूगल ऐड का भाग 1 है।

आप यह जान लें की गूगल ऐड का अच्छा खिलाड़ी वही है जो कम पैसे खर्च करके अच्छा रिटर्न प्राप्त कर सके। अच्छा रिटर्न आप तभी कमा पायेंगे जब आप निम्न बिंदुओं को ध्यान रख के काम करेंगे।

कीवर्ड टर्म

सर्च इंटेंट (सर्च करने वाले का इरादा)

क्वॉलिटी स्कोर

अच्छा लैंडिंग पेज (क्लिक के बाद का पेज)

अपने अगले लेख यानि गूगल ऐड भाग 2 में अपनी बातें जारी रखते हुए मैं अन्य कुछ जरूरी विषयों को समझाऊंगा।

लेखक:
रवि प्रकाश शर्मा


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