अटल जी: एक अतुलनीय व्यक्तित्व

भारत का एक हीरा भारत ने खो दिया, यह बात सच है कि अटल बिहारी वाजपेयी जी की कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता। एक प्रखर राजनेता, एक अतुलनीय कवि, एक बेहतरीन वक्ता और एक अखण्ड शख्सियत अब हमारे बीच नहीं है लेकिन अटल जी ने अपने जीवन को इतना बड़ा बना दिया की मृत्यु भी उसके आगे बहुत छोटी हो गई। यही कारण है कि उनकी अंतिम यात्रा में समस्त भारत एकजुट हो गया । वहाँ कोई भी कांग्रेस या भाजपा का सदस्य नहीं था, वहाँ थे तो सिर्फ और सिर्फ अटल जी को असीम प्रेम करने वाले भारतवासी। यह बात सच है कि अटल जी जाते-जाते भारत को एक करके चले गए और ऐसी खूबसूरत तस्वीर शायद ही हमें आगे फिर कभी देखने को मिले लेकिन हम अटल जी की भाषा में यही कहना चाहेंगे कि सकारात्मक रहना ही संपूर्ण शक्ति हैं। कहा जाता है कि किसी व्यक्ति को हमेशा अच्छी स्मृतियों के साथ जीवित रखना चाहिए, तो आज हम आपको अटल जी के जीवन से जुड़ी हुई कुछ ऐसी घटनाएँ बताने जा रहे हैं जो ना ही आपने कहीं पढ़ी होगी और ना ही सुनी होगी और जिन घटनाओं को जानकर अटल जी के प्रति आपका प्रेम और भी अधिक हो जाएगा।



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Atal Bihari Vajpayee जी का संपूर्ण जीवन आश्चर्य से भरा हुआ है। ऐसे ही एक आश्चर्यजनक घटना मैं आपके साथ साझा करना चाहूँगी।




1- अटल जी एक सुबह उठे तो उनके घर पर दस्तक हुई अटल जी ने जब दरवाज़ा खोला तो उनके बड़े भाई उनके दरवाज़े पर खड़े हुए थे। अटल जी ने आदर के साथ उनका स्वागत किया फिर कुछ वक्त गुज़र जाने के बाद अटल जी को यह ज्ञात हुआ कि उनके बड़े भाई इसलिए पधारे हैं कि वह चाहते हैं की अटल जी उनके नौकरी के सिलसिले में ‘सुंदरलाल पटवा’ को एक फोन कॉल करके उनका प्रमोशन पक्का करवा दें। यह जानकर अटल जी ने कहा कि आप मेरे घर आए हुए हैं सप्रेम भोजन करें और फिर अपना प्रमोशन खुद संभाल लें और यह अटल जी की ईमानदारी का एक सजीव उदाहरण था कि प्रधानमंत्री होने के बावजूद भी उन्होंने अपने सगे बड़े भाई के लिए भी उस फोन कॉल को करना ज़रूरी नहीं समझा।

2- एक बार अटल जी का एक बड़ा कार्यक्रम ग्वालियर में आयोजित होने जा रहा था। उन्होंने अपनी भतीजी को फोन कॉल करके कहा कि मैं ग्वालियर आ रहा हूँ और वह उनके यहाँ 2 दिन के लिए निवास करेंगे और भोजन भी वही करेंगे यह जानकर उनकी भतीजी बहुत खुश हो गई लेकिन कार्यक्रम के समाप्त होने के बाद जब अटल जी की गाड़ी उन्हें लेने आई तो उनकी भतीजी भी बड़े हक के साथ उस गाड़ी में प्रवेश करने लगी, यह देख अटल जी ने साफ साफ शब्दों में कहा कि नीचे उतर जाइए यह भारत के विदेश मंत्री की गाड़ी है आपके चाचा जी की नहीं।




3- एक और घटना है जो मुझे कभी भुलाए नहीं भूलती जब इस घटना के बारे में मुझे पता चला तो मैं अपनी हँसी को रोक नहीं पाई । एक बार इंदिरा गांधी ने अटल बिहारी बाजपेई जी से शिकायत करी कि वह भाषण देने के दौरान अपने हाथों को बहुत ज़्यादा हिलाते हैं तो इसके प्रत्युत्तर में अटल जी ने बड़ी सहजता के साथ सवाल किया कि ज़रा मुझे समझा दें कि पैर हिला कर भाषण कैसे दिया जाता है।

अटल जी की जिंदगी नें हमें जीना सिखा दिया। इसलिए वह सदा अमर हैं और हमारी स्मृतियों में सदा रहेंगे।

ईश्वर उनकी आत्मा को मोक्ष प्रदान करें।

लेखिका:
वैदेही शर्मा