कश्मीर- आर्टिकल 370

कृपया अपने मित्रों को भी Share करें

कश्मीर से आर्टिकल 370 का बंद होना कई नये रास्ते खुलने जैसा होगा। खुशहाली का दौर शुरू हो सकता है पर कश्मीरियों के बिना मुमकिन नहीं। सरकार को आम कश्मीरियों को विश्वास में लेना होगा। बताना होगा समझना होगा कि 35 A समाप्त होने से आपके लिए नए दरवाजे खुलने जा रहे हैं। आप का जीवन जैसा है वैसे ही रहेगा। वही पानी पिओगे वही खाना खाओगे, वही स्कूल होंगे वही कॉलेज और चुनाव छ साल की जगह पांच साल में होगा। उम्मीद है कोई भूचाल नहीं होगा; भारत सरकार का संविधान वहां चलेगा जैसा हर भारतीय के लिए है कश्मीरियों के लिए भी वही होगा। अगर आप इसको चंद अलगावादियों की बातो में आकर अपने स्वाभिमान से ना जोड़े। कश्मीरियों का रास्ता बंद नहीं हुआ बल्कि समूचे भारत से जुड़ा है। हालाकि पहले भी जुड़ा था पासपोर्ट तो लगता नहीं था। भारतीय करंसी थी लोग भी भारतीय ही थे और हैं।

annuchhed-aricle-370-jammu-kashmir-india

जैसे हर भारतीय नेता से जवाब करता है या मांग करता है। हर नेता के बच्चे सैनिक क्यों ना हो उस तरह कश्मीरियों को भी अलगावादियों से पूछना चाहिए कि आपके बच्चे पत्थरबाज क्यों नहीं। क्यों पत्थर बाजो की भीड़ गरीब और आम कश्मीरी के बच्चो की होती है। जमुरियत के किसी नेता या अलगाव की आग लिए बैठे अलगाववादी नेताओ के बच्चो की क्यों नहीं। क्यों उनको बच्चो का स्कूल कॉलेज बंद रहते है और नेताओ के बच्चे और जमुरियात की बात करने वाले के बच्चे विदेशों में आराम से पढ़ रहे हैं। कश्मीरी लोगो को अपना रास्ता चुनना होगा जिसमे अमन चैन रोजगार और बेहतर कल हो। ये एक संवेदनशील मसला हैं; इस पर महज फेसबुक ट्विटर पर चुटकुले बनाने से हल नहीं निकलेगा। जो लोग ज़मीन खरीदने के लिए उतावले हैं कितनो ने गांव से निकलकर शहर में बसकर अपने गांव में जमीन ली! कितनों ने आपने गांव का विकास किया जो कश्मीर का करेंगें !!

कश्मीरी पंडितो को बसाने की चेष्टा हो और घाटी में अभी भी सिक्ख, पंडित बहुत हैं। अगर रहना चाहे तो, सच तो ये है जो पढ़ लिखकर गांव से निकाल गया वो लौटना नहीं चाहता। पहाड़ी क्षेत्र का जीवन परिश्रम से लबरेज होता है जो आज की पीढ़ी करना नहीं चाहती और रोज़गार भी नहीं है। अब दो चार दिन के लिए वादियां, पहाड़ हमें सुहाने लगते हैं उसके बाद वो सब काटने को दौड़ते हैं।

अब उतराखंड में तो 370 का मसला नहीं था, ना ही वहां किसी ने दंगे या किसी को मारकर भगाया तो क्यों आज पलायन वहां सबसे बड़ा मुद्दा है। कश्मीर में उद्योगपति बड़ी-बड़ी कंपनिया स्थापित करें। और जिसका कोई सम्बन्ध कश्मीर से हो, पैतृक गांव हो या पूर्वज हों या कश्मीर पंडित हों जिन्हें निकाला गया था। उसके अलावा बाकी लोगो को सम्पत्ति देने का मतलब है गंदगी पोल्यूशन को बढ़ावा देना और उसका मूल स्वरूप बिगाड़ देना। हिमाचल और पूर्वोत्तर के राज्य में भी बाहरी व्यक्ति ज़मीन नहीं ले सकता। इससे वहां की आबादी और पोल्यूशन और सुंदरता बरकरार या कहें जीवित है; वरना दिल्ली का एयर इंडेक्स तो आप देखते ही हैं। हवा कम और डीजल पेट्रोल ज्यादा है, पानी की किल्लत दस्तक दे चुकी है। रेल पटरी के साथ-साथ स्लम जुग्गी बस्ती का भी विस्तार हो रहा हैं। ऐसे नज़ारे आप किसी हिल स्टेशन पर नहीं चाहेंगे।

लेखक:
मोहम्मद दानिश


कृपया अपने मित्रों को भी Share करें
कृपया नीचे अपना Comment जरूर दें :