मुस्कुराने की वजह आप खुद हैं

दोस्तों जीवन में खुश रहना है तो मुस्कुराना सीखिए। अपने मुस्कुराने की वजह आप खुद बनें।

“मुस्कुराहटें गुम हैं परेशानियों की भीड़ में,
मेरे मन का शहर कुछ उदास सा रहता हैं “

भागती दौड़ती जिंदगी और जिंदगी की भागदौड़ में ‘परेशान’ से लोग ही अब देखने को मिलते हैं। खुश रहने की वजहों की तलाश में लगे लोग आजकल बहुत कम मुस्कुराते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रत्येक व्यक्ति अपना जीवन सुख-शांति से बिताना चाहता है, हंसते-मुस्कुराते हुए जीवन व्यतीत करना चाहता है। पर जीवन की प्रतिकुल परिस्थियों में हम इतना उलझ जाते हैं कि हम मुस्कराना भूल जाते हैं। हर चेहरे पर सदैव चिंता व तनाव के भाव ही नजर आते हैं।

‘निदा फ़ाज़ली’ जी की यह पंक्ति मानवीय चिंता अभिव्यक्त करती है:

हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी,
फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी,
सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ,
अपनी ही लाश का खुद मज़ार आदमी ।

गंभीर स्वभाव, बहुत जल्दी क्रोध व्यक्त करने वाले व सदैव चिड़चिड़े स्वभाव वाले लोगों से भी हमारा सामना हो ही जाता है। शायद वजह हैं उनकी जीवनशैली, परेशानियां, चिंता, उससे उपजे उनके नकारात्मक विचार उसके फलस्वरूप उनका स्वभाव। समस्याओं के साथ कोई मुस्कुराये भी तो कैसे ? हँसने की वजह भी तो होनी चाहिए।

यह सत्य है कि जीवन मे समस्याओं की कमी नहीं होती है। जीवन अपने आप मे संघर्ष है लेकिन हमारी मुस्कुराहट में जादू है शायद ये हम भूल जाते हैं। यह खुश रहने की चाभी हैं जो हमारे पास पहले से ही है। जिस प्रकार कस्तूरी मृग को स्वयं ज्ञात नहीं होता की जीवन रक्षक औषधि कस्तूरी उसके स्वयं के शरीर के अंदर है और वह वातावरण में फैली कस्तूरी की खुशबु से उसे बाह्य वातावरण में ढूंढ़ता फिरता है। उसी प्रकार हमे स्वयं नहीं पता होता की जीवन में खुश रहना और मुस्कुराना सिर्फ हम पर निर्भर करता है और जीवन रक्षक औषधि “हमारी मुस्कुराहट” हमारे पास ही है जिसका हम कभी प्रयोग भी नहीं करते। हम सिर्फ खुश रहने की वजहों की तलाश करते रहते हैं, हँसना मुस्कुराना हम सभी के लिए जीवन जीने जैसा है।

आइये जानते है क्यों ?

“Sometimes your joy is the source of your smile, but sometimes your smile can be the source of your joy.” ― Thich Nhat Hanh.

यह कथन बिलकुल सही हैं कि हमारी खुशियां ही हमारे हँसने-मुस्कुराने का स्त्रोत होती हैं, परन्तु जीवन में यदि हम मुस्कुराना सीख लें तो हमारी मुस्कराहट हमारी खुशियों का स्त्रोत बन जायेंगी। हमारी मुस्कुराहट हमारे होंठो का कुछ इंचो में फैलाना ही नहीं होता, भौतिक रूप से यह हमारे चेहरे की मांशपेशियों का गति या व्यायाम व मनोवैज्ञानिक रूप से यह सकारात्मक Vibes या सकारात्मक लहर होती है जो हमसे होते हुए बाह्य वातावरण से संपर्क स्थापित कर विस्तारित हो जाती हैं।

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यंहा सबसे पहले vibes का अर्थ बताना चाहूंगी vibes mean “a person’s emotional state or the atmosphere of a place as communicated to and felt by others”. किसी व्यक्ति की भावनात्मक स्थिति या उसके आस-पास का वातावरण जो अन्य व्यक्तियों के सम्पर्क में आने पर उन्हें जैसा महसूस कराता है। उसे हम व्यक्ति की vibes (तरंग या लहर) के रूप में हम समझ सकते हैं।

ब्रम्हांड में उपस्थित प्रत्येक वस्तु सजीव हो या निर्जीव सभी मे ऊर्जा अंतर्निहित होती हैं। मनुष्य भी ऊर्जावान हैं; हमारे विचार, हमारे भिन्न-भिन्न प्रकार के भाव, हमारी प्रतिक्रियाएं, हमारे चारों ओर घेरे के रूप में हमारा आभा मंडल (human aura/energy field) बनाते हैं। जब भी हम मुस्कुराते हैं तब सकारात्मक ऊर्जा Vibes लहर के रूप में हमारे आभामंडल में फैल जाती है। हम हर स्थिति में सकारात्मक महसूस करते हैं, हम और भी अधिक ऊर्जावान बन जाते हैं।

हमारी यह सकारात्मक ऊर्जा हमारे सम्पर्क में आने वाले व्यक्तियों को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करती व उनमे संचारित होती है। सरल शब्दों में समझे तो हम अपनी मुस्कराहट के जरिये एक से दूसरे में, दूसरे से अन्य व्यक्तियों में परस्पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं यह पूर्ण रूप से हमारे व्यक्तित्व को प्रभावित करती है।

हमारी मुस्कुराहट का जादू यहीं पर खत्म नहीं होता यह हमारे व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ हमें मानसिक रूप से पूर्णतः प्रभावित करती है। हम सभी को यह भलीभांति ज्ञात है कि हमारा मष्तिष्क हमारे शरीर को नियंत्रित करता हैं। हमारा सोचना, समझना, सीखना, हमारी याददाश्त, हमारी पांचो इन्द्रियों से संदेश प्राप्त कर प्रतिक्रया का निर्धारण व आंतरिक क्रियाओं का संचालन व नियंत्रण, सब कुछ हमारे मष्तिष्क का कार्य होता है। जीवन में आने वाली सम व विषम परिस्थिति हमारे शारीरिक व मानसिक स्तर को संतुलित करती है। परन्तु हम अपने इस Master Mind का बिलकुल भी ख्याल नहीं रखते। समस्याओं को हम अपने जीवन पर इस तरह हावी होने देते हैं कि हमे मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। लेकिन हँसने-मुस्कुराने से हम अपने मष्तिष्क का पूर्ण रूप से ख्याल रख सकते हैं।

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प्रत्येक बार जब हम मुस्कुराते हैं तब मष्तिष्क की तंत्रिकाएं (nerves) relaxation आराम का अनुभव करती हैं। हमारे मुस्कुराने पर हमारे चेहरे की 10 मांशपेशियों में गति होती है जिनका सम्बंध हमारे मष्तिष्क के उस भाग से होता है जो भाग खुशी व आनंद की स्थिति में सक्रिय होता है। हमारी मुस्कुराहट के साथ ही हमारे मष्तिष्क में न्यूरोपेप्टाइड्स का स्त्राव होता हैं (Neuropeptides are small protein-like molecules (peptides) used by neurons to communicate with each other.) न्यूरोपेप्टाइड्स छोटे प्रोटीन अणु (पेप्टाइड्स) होते हैं जो पूरे शरीर से तंत्रिकाओं को संवाद के लिए सक्रीय करते हैं।

जब भी हम हँसते हैं, मुस्कुराते हैं तो हमारे मष्तिष्क में feel good chemical /neurotansmitters डोपामिन, एंड्रोफिन, सेरेटोनिन स्त्राव होता हैं। #dopamine एक ऐसा केमिकल है, जो लोगों को movement गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जिसकी कमी से पार्किंसन रोग हो सकता हैं जो कि गति अवरोधक रोग होता है तथा हमे plessure आनंद का अनुभव कराने के लिए उत्तरदायी होता है। यह हृदय संबंधी रोगों से हमारा बचाव करता है हमारे हृदय गति व रक्त चाप को नियंत्रित करता हैं।

Endorphin मष्तिष्क में तनाव को कम करता हैं। Stress जब बढ़ जाता है तब हम मुस्कुराना तो भूल जाते हैं। चिंता tension सदैव हमारे चेहरे पर बनी रहती है जो हमारे तनाव को और भी ज्यादा बढ़ा देती है। लेकिन तनाव मे भी अगर हम नकली मुस्कान भी अपने चेहरे पर लायें तो भी मष्तिष्क एंड्रोफिन केमिकल को सक्रीय करता है जो हमारे मंद स्ट्रेस के स्तर को सामन्य करने में हमारी मदद करता है। इसके साथ ही एंडोर्फिन एक प्राकृतिक दर्द निवारक की तरह कार्य करता हैं, दर्द की स्थिति में यदि हम जानबूझ कर भी मुस्कुराये तो यह हॉर्मोन सक्रिय होकर हमें दर्द से राहत पहुचाता है और पेनकिलर गोली की तरह इसका हमपर कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता।

आजकल की सबसे बड़ी मानसिक समस्या है depression, जो कि कुछ स्थितियों में आत्मघाती भी होती है। मुस्कराने पर सेरेटोनिन सक्रिय होता है जो कि एक antidepressant chemical होता है; जिसे डिप्रेसन, उदासीनता, विषाद को treatment में उपयोग किया जाता हैं। आपकी एक मुस्कुराहट के साथ आप अपने तनाव चिंता डिप्रेशन जैसी स्थितियों का भी पूर्णतः निवारण कर सकते हैं।

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एक बहुत मुख्य बात यह है कि हमारा मष्तिष्क हमारी मुस्कुराहट को चेहरे की मांशपेशियों की एक क्रिया के रूप में समझता है हमारी हँसी असली हो या नकली वह प्रतिक्रिया के रूप में अपनी क्रिया करता है।

हमारी मुस्कुराहट संक्रामक contagious होती है, अर्थात यदि हम मुस्कुराते हुए लोगों से मिलेंगे तो आप स्वतः ही मुस्कुरायेंगे। मुस्कुराते हुए लोग सभी को प्रभावित करते हैं और आकर्षित करते हुए नजर आते हैं। आपकी मुस्कुराहट में आपके व्यक्तित्व को शशक्त व आपके मन मष्तिष्क को स्वस्थ बनाने की शक्ति होती है। जिस प्रकार हम रोज शारीरिक व्यायाम करते हैं ताकि हम शारीरिक रूप से तंदुरुस्त रहें, उसी प्रकार हमें अपनी मुस्कराहट को भी अपने व्यायाम में प्रतिदिन शामिल करना चाहिए। शोधों में यह पाया गया हैं कि छोटे बच्चे एक दिन में सामान्यतः 400 बार मुस्कराते हैं और एक वयस्क एक दिन में मात्र सामान्यतः 20 बार मुस्कुराता है बच्चों व उनका मष्तिष्क कितना अधिक ऊर्जावान होता है यह तो हम सभी भली भांति जानते हैं।

जीवन मे समस्याएं जीवन का हिस्सा होती हैं पर जरूरी है हम उनसे स्वयं को प्रभावित ना होने दें। जितना ज्यादा हो सके मुस्कुरायें व दूसरों के जीवन मे भी मुस्कुराहट का कारण बनें। तनाव से दूर रहें, सदैव सकारत्मक ऊर्जा को स्वयं में संचित होने दें और उसका निरंतर विस्तार करते रहें। यह ऊर्जा वातावरण से प्रतिबिम्ब के रूप में (in the form of reflection) दोगुनी होकर हमतक वापिस आएगी। अतः सदैव ऊर्जावान बने रहें, जीवन में अपने चेहरे पर सदैव एक प्यारी सी मुस्कराहट बनाये रखें।

लेखिका:
रचना शर्मा