जानिये क्रिप्टोकरेंसी के बारे में

आज की डिजिटल दुनियां में सब कुछ बहुत जल्दी ऑनलाइन हो रहा है। शॉपिंग, पैसा लेनदेन, स्वास्थ, फूड डिलीवरी, शॉपिंग, बैंकिंग, स्कूल, टूशन एवं यहाँ तक की शादी के रिश्ते भी ऑनलाइन खोजे जा रहे हैं. ये कोरोना महामारी पूरी दुनियां को फिजिकल प्लेटफार्म से आभासी या वर्चुअल प्लेटफार्म में कदम रखने पर मजबूर कर चुकी है। आम जनता की रूचि भी डिजिटल दुनियां की तरफ धीरे-धीरे बढ़ रही है और इस रूचि परिवर्तन का लाभ उठाने क लिए सारी बड़ी कंपनी डिजिटल बाजार की तरफ अपना रुख कर रही है।

अगर हम पैसे के लेनदेन का इतिहास देखें तो हमें पता चलता है कि पुरातन काल में सामान के बदले सामान लेन-देन की प्रथा थी। फिर आया पैसे के बदले सामान लेने का चलन। हम पैसे अपने हाँथ से देते हैं और उसके बदले हमें सामान प्राप्त होता है। मानवीय तरक्की एवं टेक्नोलॉजी की समझ ने फिर एक नई क्रांति को जन्म दिया और फिर ऑनलाइन मनी ट्रांसफर का नया दौर शुरू हो गया जिसे हम अभी भी इस्तेमाल कर रहे हैं। परन्तु बदलती टेक्नोलॉजी की रफ़्तार इतनी ज्यादा है कि यह निरंतर बदलाव ला रही है।

ऐसे ही अभी एक नया दौर शुरू हुआ है जिसका नाम है क्रिप्टो करेंसी।
हमने करेंसी के बारे में तो सुना है परन्तु ये क्रिप्टोकरेंसी है क्या ? इसकी ज़रुरत क्या है ? कब इसका आरंभ हुआ ? एवं ये कैसे काम करता है ? ये सारे सवाल आपके दिमाग में आते होंगे। तो आइये Cryptocurrency के बारे में आज इस लेख के माध्यम से हम विस्तार से चर्चा करते हैं।

क्रिप्टोकरेंसी क्या है ?
Cryptocurrency Meaning in Hindi

क्रिप्टो करेंसी को अगर हम साधारण भाषा में बोलें तो ये एक डिजिटल या आभासी मुद्रा है, दूसरे शब्द में इसे इलेक्ट्रॉनिक मनी के नाम से भी जाना जाता है। इसे कूटलिपि या कूटलेखन (क्रिप्टोग्राफी) द्वारा सुरक्षित किया जाता है। इस प्रक्रिया से ये डिजिटल मुद्रा को नकली करना लगभग असंभव सा हो जाता है। कई क्रिप्टोकरेंसी ब्लॉकचैन नामक तकनीक पर आधारित हैं और ये कंप्यूटर के एक अलग नेटवर्क द्वारा लागू एक वितरित खाता द्वारा संचालित होता है। क्रिप्टोकरेंसी की एक परिभाषित विशेषता यह है कि ये आम तौर पर सरकारी नियंत्रण के आधारित जारी नहीं की जाती है।

हम ये कह सकते हैं की Cryptocurrency एक नेटवर्क पर आधारित है जो की एक डिजिटल संपत्ति का रूप है। यह विकेंद्रीकृत संरचना के लिए ये मुद्रा सरकारों और केंद्रीय अधिकारियों के नियंत्रण से बाहर रह सकता है।

क्रिप्टोकरेंसी शब्द एन्क्रिप्शन या कूटलेखन तकनीकों से लिया गया है जिनका उपयोग नेटवर्क को सुरक्षित करने के लिए किया जाता है। क्रिप्टोकरेंसी को डिजिटल मुद्रा भी कहा जा सकता है क्योंकि ये सिर्फ डिजिटल माध्यम में ही उपलब्ध है। वास्तविक रूप में इसका लेनदेन नहीं किया जा सकता; जैसे यूरो, रूपया, डॉलर, ये सब भिन्न देशों की मुद्रायें पूरी दुनियां में प्रचलित हैं ठीक वैसे ही क्रिप्टोकरेंसी पूरी दुनियां में इस्तेमाल किया जा सकता है, बस इस पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं हो सकता। आजकल इसे डिजिटल संपत्ति के तौर पे भी लोग इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे सामान या सेवा (गुड्स और सर्विसेज) की खरीदारी की जा सकती है।

क्रिप्टो करेंसी के प्रकार:
Types of Cryptocurrency in Hindi

अब ये प्रश्ना आता है के क्रिप्टो करेंसी इतने प्रकार के बाजार में आज उपलब्ध है। तो प्रयुक्ति के विस्तार के साथ साथ हर दिन नई टेक्नोलॉजी आ रही है जिसके लिए आज बहुत प्रकार के क्रिप्टो मुद्रायें बाजार में आ चुकी हैं। परन्तु हम आज उन्हीं सब क्रिप्टो करेंसी के बारे में बात करेंगे जो की मार्केट में अपनी जगह बना चुका है।

बिटकॉइन:
Bitcoin

क्रिप्टो करेंसी में सबसे पहले जिस मुद्रा का आगमन हुआ उसका नाम है बिटकॉइन। 8 अगस्त 2008 में बिटकॉइन का डोमेन नाम रजिस्टर किया गया था और उसी साल 31 अक्टूबर को सातोशी नाकामोतो नामक एक व्यक्ति ने बिटकॉइन नाम का उल्लेख उसके एक आर्टिकल में किया था। उन्होंने ये भी कहा था कि ये पीयर टू पीयर इलेक्ट्रॉनिक कैश सिस्टम (Peer to peer electronic cash system) है और 3 जनवरी 2009 को बिटकॉइन का अस्तित्व इस दुनियां में देखने को मिला।

शुरुआत में बिटकॉइन का मूल्य ना के बराबर था, फिर धीरे-धीरे बिटकॉइन बाजार में अपना पहचान बनाने लगा। अप्रैल 2021 में इसका मूल्य $60,000 तक हो गया था जिसका भारतीय मुद्रा के अनुसार कीमत है 44 लाख रुपये। अभी इससे आप को समझ में आ गया होगा कि क्रिप्टो करेंसी का बाजार मूल्य कितना तेजी से बढ़ रहा है।  

बिटकॉइन को आप इ-वॉलेट के जरिये ट्रांसफर कर सकते हैं और ऑनलाइन खरीदारी के समय इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। बिटकॉइन आजकल निवेशकों के लिए बहुत ही ज्यादा लाभदायक है। बिटकॉइन के विशेषज्ञों का मानना है कि ये आने वाले दिनों में और ज़्यादा रिटर्न देगा।

एथेरेयम:
Ethereum

अगर बिटकॉइन के बाद कोई दूसरा क्रिप्टो करेंसी है तो वो है एथेरेयम। आज कि तारीख में ये इतना मशहूर हो गया है की ये सबका ध्यान बिटकॉइन से अपनी ओर खींच रहा है। मई 2021 के महीने में ये $4000 के मूल्य को छू गया था और 2021 के शुरुआत में ही 450% से भी ज़्यादा के उछाल पर गया था।
 
अगर बिटकॉइन से साथ इसकी तुलना की जाय तो ये कहा जा सकता है की बिटकॉइन एक पेमेंट नेटवर्क है जो की दुनिया में कहीं भी बैठे दो अथॉरिटी के बिच वैल्यू आदान-प्रदान कर सकता है और मुख्यतः ये निवेश के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है।

किन्तु एथेरेयम एक आधारभूत संरचना और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाता है जो की कोई एक अथॉरिटी के लिए नहीं है। अगर इसे दूसरे तरीके से कहा जाय तो एथेरेयम के निर्माता ने कहा है की बिटकॉइन एक पॉकेट कैलकुलेटर के जैसा है जिससे आप सिर्फ एक ही काम बार-बार कर सकते हैं पर एथेरेयम एक स्मार्ट फ़ोन जैसा है जहाँ आप नए-नए एप्लीकेशन बना सकते हैं। एथेरेयम का वर्तमान मूल्य भारतीय रुपये में 2 लाख है।

लाइटकॉइन:
Litecoin

बिटकॉइन की तरह लाइटकॉइन भी एक डिजिटल करेंसी है जो की ब्लॉक चैन प्रयुक्ति पर आधारित है और ये भी अन्य क्रिप्टो करेंसी जैसा ही खुला स्रोत है। यह भी वैश्विक भुगतान नेटवर्क (open source global payment network) पर काम करता है। अक्टूबर 2011 में इसे पूर्व गूगल कर्मचारी चार्ली-ली ने बनाया था।
 
ये बिटकॉइन से दो चीज़ो में अलग है –  पहला इसके ब्लॉक बनाने की तेज़ी बिटकॉइन से ज्यादा है और दूसरा ये स्क्रिप्ट का इस्तेमाल करता है ब्लॉक बनाने के लिए। अगर हम बिटकॉइन को सोना कहते हैं तो लाइटकॉइन को हम चांदी कह सकते हैं। इस क्रिप्टोकरेंसी की एक खूबी ये है कि इसे एक बार से ज्यादा माइन कर सकते हैं इसीलिए इसका मूल्य इतना ज्यादा है। बिटकॉइन मार्केट का सबसे पहला क्रिप्टो करेंसी है और इसको एक सिमित संख्या में बनाया गया है। मगर ली ने इसी संख्या को और बढ़ाने के लिए लाइटकॉइन को बनाया और बड़ी संख्या में बाजार में छोड़ दिया। जहाँ बिटकॉइन का कॉइन लिमिट 21 मिलियन है तो वहीं वह लाइटकॉइन का कॉइन लिमिट 84 मिलियन है।

लाइटकॉइन भविष्य के लिए काफी लाभप्रद निवेश है और इसके निम्नलिखित कारण हैं –

1 – इसका काफी जल्दी ट्रांज़ैक्शन हो जाता है।  
2 – इसकी संख्या बिटकॉइन के मुकाबले 4 गुना है।  
3 – इसका वर्तमान मूल्य भारतीय मुद्रा में 13 हज़ार है जो कि ऊपर बताये गए 2 क्रिप्टोकरेन्सी के मुकाबले काफी कम है, यही कारण है की लोग इसमें ज़्यादा पैसा निवेश करने की सोच रहे हैं।

डॉजकॉइन:
Dogecoin

जहां हर दिन क्रिप्टोकरेंसी नए-नए लोगों को करोड़पति बना रहा है वहां निवेश के लिए लोग नए-नए क्रिप्टो में रूचि भी दिखा रहे हैं। बिटकॉइन, लाइटकॉइन, एथेरेयम, के साथ-साथ और एक नाम बाजार में हलचल मचा रहा है जिसका नाम है डॉजकॉइन। दो सॉफ्टवेयर इंजीनियर बिली मरकुस और जैक्सन पाल्मार ने खेल-खेल में एक पेमेंट सिस्टम बनाने का सोचा और बना डाला डॉजकॉइन।

डॉजकॉइन की एक खास बात ये है की ये एक लिमिट लेस्स करेंसी है। इसका मतलब है की इसे जितनी मर्ज़ी उतनी संख्या में बनाया जा सकता है। जहाँ बिटकॉइन की कॉइन लिमिट 21 मिलियन है वहीं डॉजकॉइन की कोई सिमा नहीं है। इसकी सफलता के पीछे कुछ खास लोगों का सपोर्ट है जैसे की स्नोप डॉग, एलोन मस्क।

रिपल:
Ripple

हम में से ज्यादातर लोग क्रिप्टोकरेन्सी के नाम पर सिर्फ बिटकॉइन, लाइटकॉइन, एथेरेयम इन तीन नामों के बारे में ही जानते होंगे। लेकिन बाजार में कुछ और भी क्रिप्टो करेन्सी है जिसका भाव दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है जिसका नाम है रिपल। अगर हम मार्केट कैपिटलाइजेशन की बात करें तो ये छठवें नंबर पर आता है। असलियत में ‘रिपल’ नाम वो है जिसे इस क्रिप्टोकरेंसी के पीछे छापा गया है किन्तु इसको मूलतः XRP के नाम से जाना जाता है जो कि इसका वास्तविक नाम है।

बिटकॉइन के मुकाबले रिपल बहुत जल्दी ट्रांसफर हो जाता है और इसका ट्रांज़ैक्शन अमाउंट भी बहुत कम है। बिटकॉइन के मुकाबले XRP की माइनिंग का तरीका आसान और बेहद सहज है। जैसे की बिटकॉइन में ब्लॉकचेन माइनिंग कॉन्सेप्ट उपयोग किया जाता है, रिपल में ये नेटवर्क लेनदेन को मान्य करने के लिए एक अद्वितीय वितरित सर्वसम्मति तंत्र का उपयोग किया जाता है। यह कोई भी सरकारी हस्क्षेप के बिना लगभग तुरंत पुष्टि को सक्षम बनाता है।

बाजार में लगभग 1 मिलियन रिपल फैला हुआ है जो की बहुत ज्यादा लोगों तक पहुँच सकता है लेकिन इस मामले में बिटकॉइन सिर्फ 21 मिलियन ही है और इसी कारण बिटकॉइन काफी महंगा है। रिपल को पहली बार बाजार में सन 2012 में पेश किया गया था। क्रिस लार्सन और जेड मैककलेब को इसका निर्माता कहा जाता है। Ripple को पेमेंट सेटलमेंट, एसेट एक्सचेंज इत्यादि काम के लिए बनाया गया है जो की अंतर्राष्ट्रीय धन और सुरक्षा हस्तांतरण के लिए SWIFT प्रणाली के समान है।

डैश:
Dash

डैश भी एक क्रिप्टोकरेंसी का नाम है जो की एक ओपन सोर्स क्रिप्टो है। जनवरी 2014 में इसको पहली बार मार्केट में रिलीज़ किया गया था और तब से लेकर आज तक ये काफी चर्चा में है। फ़ीनिक्स में रहने वाले एक शख्स Evan Duffield ने इसको पहली बार मार्केट में उतारा और ये सोच के लाया की ये बिटकॉइन की कमी कि भरपाई करेगा। Duffield ने इसकी संरचना कुछ इस तरीके से बनायी की इसके ज़रिये ट्रांसक्शन बहुत ही जल्दी हो सके।
 
पहले ये डैश को Xcoin के नाम से जाना जाता था और बाद में इसको डार्ककॉइन का नाम दिया गया। बहुत लोग इसके नाम को डिजिटल कैश का संक्षिप्त रूप कहते हैं। कंपनी अभी Xcoin को आम ज़िन्दगी का हिस्सा बनाना चाहती है जैसे की दैनिक लेनदेन, क्रेडिट, पे-पाल के ज़रिए लेनदेन आदि।

पॉलीगोन:
Polygon

भारतीय मुद्रा बाजार में जो क्रिप्टो करेंसी अब सबसे ज्यादा चर्चा में है वो है पॉलीगोन। ये एक भारतीय ब्लॉकचैन स्कलबिलिटी प्लेटफार्म है जो की कई मात्रा में दूसरे क्रिप्टो करेंसी से अच्छा ऑप्शन देता है। एथेरेयम के ट्रांज़ैक्शन बारे में लोग ज्यादा शिकायत करते हैं मगर पॉलीगोन में ट्रांज़ैक्शन एवं चार्जेज से संबंधित शिकायतों को दूर किया गया है। इस क्रिप्टो का लक्ष्य ये है की एथेरेयम संगत ब्लॉकचेन की Multi-Chain Ecosystem को स्थापित करे।

स्टॉक मार्केट पिछले हफ्ते नीचे की तरफ जाने का संकेत दे रहा था, बहुत सारे इन्वेस्टर्स कुछ नया और नायब इन्वेस्टमेंट के बारे में सोच रहे हैं और इसमें पॉलीगोन एक अच्छा ऑप्शन है। अब ये प्रश्न बहुत स्वाभाविक है की इसको बनाये किसने है ? तो आप की जानकारी के लिए बता दूँ इस क्रिप्टो को 4 भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बनाया है जिनके नाम हैं – जयंती कनानी, संदीप नैलवाल, अनुराग अर्जुन और मिहाइलो बजेलिक। इसका मुख्यालय भारत के आर्थिक शहर मुंबई में स्थित है।

क्या क्रिप्टोकरेंसी ही भविष्य है ?

आज हम शेयर बाजार के बारे में बहुत कुछ जानते हैं और काफी सारे लोग भी शेयर में निवेश करते हैं। इसका मतलब ये है की भारत में शेयर मार्केट का भविष्य काफी अच्छा है। काफी सारे एनालिस्ट शेयर मार्केट के बारे में भविष्यवाणी भी करते हैं, लेकिन कोई भी व्यक्ति क्रिप्टोकरेंसी के लिए जो भी भविष्यवाणी करता है, वो आज की तारीख में सही मानना बिलकुल भी ठीक नहीं है।
 
पर बहुत सारे एक्सपर्ट्स का ये कहना है कि क्रिप्टो ही भविष्य है। आज से 20-30 साल बाद हम क्रिप्टो करेंसी के बिना कुछ कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में सारा पैसा एन्क्रिप्शन का एक रूप हो जायेगा और जैसे-जैसे हमारा जीवन डिजिटल दुनियां के साथ और अधिक निकटता से जुड़ता जायेगा, टोकन में निवेश करने का अभियान तेज होगा।

नीचे वर्णित कुछ कारणों के आधार पर ये कहा जा सकता है की क्रिप्टो भविष्य में राज करेगा –  

1 – क्रिप्टोकरेंसी पारंपरिक वित्तीय बाजार को बाधित करेगी क्योंकि उनकी सबसे आकर्षक उपयोगिताओं में से एक है कम लागत, विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव के साथ अंतर्देशीय भुगतान को कुशलतापूर्वक स्थानांतरित करने की क्षमता क्रिप्टो में है।

2  – सेंट्रल बैंक के अधिकारी क्रिप्टोकरेंसी पर नियम विकसित करने में व्यस्त हैं। वे मानते हैं कि डिजिटल मुद्राएं डिजिटल अर्थव्यवस्था की मूल निवासी हैं और इस तरह, अगले 10 वर्षों में मुख्यधारा बनने की राह पर हैं।

3 – विभिन्न अनुमानों के अनुसार, लगभग 15 मिलियन भारतीयों के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने निजी क्रिप्टो संपत्ति में निवेश किया है। अप्रैल 2020 से सिर्फ एक साल में, देश में क्रिप्टो निवेश मई 2021 तक 923 मिलियन डॉलर से बढ़कर लगभग 6.6 बिलियन डॉलर हो गया।

क्रिप्टोकोर्रेंसी के फायदे:

  • आसान लेनदेन प्रक्रिया
  • कम से कम समय में लेन-देन
  • गोपनीय लेन-देन
  • आसान अंतर्राष्ट्रीय लेन-देन
  • कम शुल्क

वर्त्तमान स्थिति में हम डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपना चुके हैं। आने वाले दिनों में क्रिप्टो करेंसी दुनियां का फाइनेंसियल ट्रांज़ैक्शन का माध्यम होने वाला है इसमें कोई शक नहीं है।

क्रिप्टोकरेंसी में जोखिम:
Risks in Cryptocurrencies

हालांकि दुनियां क्रिप्टो करेंसी की तरफ तेज़ी से बढ़ रही है परन्तु इसकी कुछ बातें ऐसी हैं जो इसे बहुत जोखिम भरा भी बना देती हैं। आइये अब इस पर थोड़ा नज़र डालते हैं –
 
1 – मापनीयता या स्कलबिलिटी:

क्रिप्टो करेंसी में आज कि तारीख में सबसे ज्यादा जो परेशान करने वाली बात है वो है इसकी मापनीयता।  इसको एक सीमित मापनीयता पर ही बनाया जा सकता है और उसके बाद इसे बढ़ाना बहुत मुश्किल है।
 
2 – साइबर सुरक्षा:

ये एक डिजिटल करेंसी है और इंटरनेट द्वारा कण्ट्रोल की जाती है, अतः इसकी सुरक्षा बहुत जरूरी है और ये बेहद मुश्किल भी है। दुनिया में बहुत बुद्धिमान हैकर्स हैं जो किसी भी प्रकार के इन्क्रिप्शन को हैक करके उसे कहीं भी ट्रांसफर कर सकते हैं।

3 – असंतुलित मूल्य और निहित मूल्य की कमी:

इस मुद्रा में आज की तारीख में संतुलन की मात्रा बहुत कम है जिसके लिए इसे एक बबल के रूप में भी देखा जा रहा है। ये असंतुलित चरित्र इस डिजिटल मुद्रा के विस्तार में बहुत बड़ी बाधा है जिससे अधिकांश लोग इसमें निवेश करने से डर भी रहे हैं।
 
4 – नियंत्रण एवं नियम का आभाव:

जबसे क्रिप्टो करेंसी का जन्म हुआ है तब से इसपर किसी भी सरकार या फेडरल रिजर्व या सेंट्रल बैंक का कोई भी नियंत्रण नहीं है। ये एक बहुत ही बड़ा कारण है कि लोग इसमें ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहते।

क्रिप्टो में निवेश करने की प्रक्रिया:

जो भी नए निवेशक इसमें निवेश करना चाहते हैं वो क्रिप्टो एक्सचेंजों के माध्यम से व्यापार में शामिल हो सकते हैं जो की सबसे आसान तरीका है। क्रिप्टोकरेन्सी एक्सचेंज एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो आपको सभी प्रकार की क्रिप्टोकरेंसी खरीदने या बेचने की सुविधा देता है और इसके माध्यम से आप क्रिप्टो का लेनदेन कर सकते हैं। शेयर बाजार के विपरीत, क्रिप्टोकरेंसी का व्यापर 24/7 संचालित होता है और स्व-विनियमित रूप से चलता रहता है। क्रिप्टो ट्रेडिंग शुरू करने के लिए यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं।

  • एक क्रिप्टो एक्सचेंज को चुनिए और उस पर आप रजिस्ट्रेशन कर लीजिए
  • रजिस्ट्रेशन के बाद आप अपना KYC अपलोड कर दीजिए
  • क्रिप्टो एक्सचेंज में आप को पहले कुछ अमाउंट डालना पड़ेगा। आमतौर पर, आप पैसे जमा करने और दस्तावेज़ अपलोड करने के तुरंत बाद व्यापार शुरू नहीं कर पाएंगे। आपको सत्यापित करने के लिए एक्सचेंज को कुछ समय लगता है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह उपयोगकर्ताओं को सूचित करता है।  
  • शुरुआत में कम लागत से निवेश शुरू कीजिए। ये बाजार बहुत ही ज्यादा परिवर्तनशील है जिससे यहाँ आपका निवेश बहुत तेज़ी से बढ़ भी सकता है और कम भी हो सकता है।
  • कोई भी एक क्रिप्टो करेंसी को चुन लीजिए और उसमें ट्रेड करना शुरू कीजिए।

अंत में,

क्रिप्टो करेंसी को लेकर फ़िलहाल दुनियां अभी पूरी तरह से तैयार नहीं है किन्तु यह भविष्य की मुद्रा है इस बात को झुठलाया भी नहीं जा सकता। फ़िलहाल भारत में क्रिप्टो करेंसी को ऑनलाइन ट्रेड किया जा सकता है और निवेश भी किया जा सकता है। मगर अभी भारत में क्रिप्टो करेंसी का मुद्रण संभव नहीं है अर्थात आप किसी दुकानदार को क्रिप्टो करेंसी देकर सामान नहीं खरीद सकते।

निवेश के लिहाज से क्रिप्टो करेंसी एक अच्छा ऑप्शन है मगर समझदारी भरा निवेश ही करें।

लेखक:
कौशिक माजी

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