कथा कहानी Hindi Stories – भारतीय हिंदी कहानियां Online Archive

‘वो लड़की’ – हिंदी कहानी

सन 1993, उत्तर प्रदेश के एक छोटे कस्बे से निकलकर आज मैं एक अंजाने शहर की ओर प्रस्थान करने वाला था। उम्र महज 9 साल, गांव का एक साधारण जा जान पड़ने वाला रेलवे स्टेशन जहाँ मैं अपने पिता और माँ के साथ आने वाली ट्रेन की प्रतीक्षा कर रहा था। मिलिट्री में कार्यरत

दीवारों के केवल कान नहीं आँखें भी होती हैं

” सीता राम चरित अति पावन ! मधुर सरस अरु अति मन भावन !! पुनि-पुनि, कितनेहू सुने सुनाये हिय की प्यास, बुझत ना बुझाये ! सीता राम चरित अति पावन ! मधुर सरस अरु अति मन भावन !! “ सन 1987 दिन रविवार समय सुबह 9:30 मिनट पर टीवी सीरियल ‘रामायण’ की यह चौपाईयाँ

बाबूजी हिट्लर – हिंदी कहानी

1990 का दशक बेशक कितना भी अच्छा क्यों न हो पर एक मामले में बेहद बुरा था। 1990 के दशक में बाप अपने बच्चों से हिट्लर जैसा व्यव्हार ही करते थे। घर कि लड़कियां तो शायद बच भी जायें किन्तु लड़का बाप रुपी हिटलर का फ़रमान सुनने को बाध्य रहता। तड़के भोर 4 बजे

बागीचा – हिंदी कहानी

हमेशा की तरह रामकली आज भी तड़के सबेरे 4 बजे उठ गयी। बड़ी बहु को सोता देख बुदबुदाते स्वर में कहती है – सुबह के चार बज गये, अभी तक सो रही है। कहां सास-ससुर को चाय बनाकर देती पर वो भी मुझे ही करना पड़ रहा है। बड़े भाग से मिली है ऐसी

‘दुनियां’ – हाँ इस दुनियां से जुदा एक लड़की हूँ मैं

दुनियां, मैं वैसी नहीं हूँ जैसा कि तुम मुझे देखना चाहती हो। हाँ यह बात सच है कि मैं तुमसे अलग हूँ, मैं किसी और की तरह नहीं होना चाहती क्योंकि मैं बस खुद के जैसी हूँ। मैं वह नहीं हूँ जो खूबसूरत दिखने के लिए उस महंगे काजल का सारा दिन इस्तेमाल करती

ऐकल्लता भाग – 2, अनजानी भूल

छोटे-छोटे पर्वत एक तरफ जंगल इलाका एक तरफ मैदानी इलाका दूर से देखने में ऐसा प्रतीत होता है जैसे किसी देवता ने इस गांव को बनाया हो। 25 से 30 मुसलमानों और सिक्ख रहते थे एक स्कूल जहां सिर्फ उर्दू की भी पढ़ाया जाता था। दो दोस्त निहाल सिंह और शौकत अली दोनों ने

अगर मैं अब्बा होती

अब्बा मैं यह जानती हूँ कि तुम अब्बा हो फिर भी तुम यह जान लो कि अगर मैं अब्बा होती तो मैं यूँ ना करती। हाँ, तमाम शिकायत है मुझे तुमसे शायद महज़ इसलिए कि तुम अब्बा हो। अगर मैं अब्बा होती तो यूँ कभी ना करती कि तुम्हारे कपड़े आ जाने से खुद

काली – एक प्रेरणादायी कहानी

शाम का वक़्त था , लता रोज की तरह आज भी बकरियां चरा कर अपने घर जा रही थी। हां वो लोग बकरियां पालते थे और मिटटी के बर्तन भी बनाने का काम भी किया करते थे। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, घर में माँ-पिताजी व दो छोटी बहनें और एक छोटा

राम जी – एक हिंदी कहानी

सन 1992, Montessori Junior High School जो की एक गैर सरकारी विद्यालय था; जिसमें कक्षा 1 से लेकर कक्षा 8वीं तक के बालक बालिकाएं अध्ययन किया करते थे। यह विद्यालय गैर सरकारी होते हुए भी सरकारी विद्यालयों की तरह ही जान पड़ता था, जहाँ दौर के हिसाब से व्यवस्था अत्यंत ही साधारण थी। परन्तु

“हमसफ़र” – लघु हिंदी कथा

“मैं तुम्हारे साथ और नहीं रह सकता” “हाँ , तो मुझे भी तुम्हारा साथ कौन सा बर्दाश्त होता है ?” “वह तो बस यूं था कि बच्चों को संभालना था वरना मैं कब का यहाँ से जा चुकी होती” “अब मुझे तुमसे तलाक चाहिए” “हाँ मैं भी यही चाहती हूँ” यह एक और रात