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चिंटू चायवाला

चिंटू उम्र 6 वर्ष, शरीर पर धूल-मिट्टी लगाए घर में घुसते हुए माँ…ओ माँ..सुन ना! माँ मुझे भी पढ़ना है, स्कूल जाना है पढ़-लिख कर बड़ा आदमी बनना है। रामवती (चिंटू की माँ) आश्चर्य से चिंटू की ओर देखते हुए!! क्या बोल रहा हैं, कौन बोला तुझको को ये सब, पढ़ना हैं बड़ा आदमी

हिंदी कहानी – समाज

एक तरफ़ पहाड़ झाड़ियां तीन तरफ़ मैदानी इलाका, उस गाँव में गेहूँ मक्का से ज़्यादा बाग़-बागीचे तो कहीं अमरूदों के पेड़। खुशहाल गाँव के लोग एक दूसरे की अधिक से अधिक इज्जत करते जो गाँव का सरपंच कह दे, सारा गाँव उसे खिले माथे मान लेते। गाँव में लोग पशु-पालना बैलगाड़ीयाँ रखने में बड़ा

2019 की नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति

गत कुछ वर्षों से सभी को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का बेसब्री से इंतजार था। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 को लेकर सभी के मन में बहुत सारे सवाल उतपन्न हो चुके हैं कि कहीं शिक्षक की भर्ती प्रक्रिया जो थी वो मुश्किल तो नहीं हो गयी है ? तो हम बता दें कि

हिंदी कविता – समझ

कविता शीर्षक – ‘समझ’ छोड़ यार मुझे समझाता, ख़ुद सोचो में डूब जाऐगा।तू सारा कुछ छोड़ कर, मेरी दुनिया में चला जाऐगा। मैं हूँ एक पहेली सी,तू मुझे सुलझता आप उलझ जाऐगा।दुशमनी करके क्या फ़ायदा मेरे साथ, तू,हमारा दोस्त सदा के लिए बन जाऐगा। देखता देखते इस जग को, हमेशा के लिए हमारे राह

हरित वातावरण और सरकारी व्यय

वातावरण को लेकर सभी देश , सरकार व समाज का हर वर्ग चिंतित है । परंतु उसके लिए त्याग की भावना शून्य है। हर सरकार भारी भरकम बजट बनाती है। हर शहर में हॉर्टिकल्चर विभाग होते है। हजारों स्टाफ करोड़ों अरबों का बजट पर हम वहीं खड़े हैं, कोई विशेष उत्थान नहीं हुआ। इसके

लालटेन – लघु कथा

द्वार पर बैठे ‘बाबा सुखीराम‘ ने अपने नाती-पोतों को आवाज़ मारते हुए कहा – सांझ हो गया जी, तुमलोग लालटेन नहीं बारे ? चलो सबलोग लालटेन लेकर आओ पढ़ाई करो ! प्रतिदिन शाम के 7 बजते ही ‘बाबा सुखीराम’ यूँ आवाजें मारकर बच्चों को पढ़ने के लिए बुलाते। सुखीराम अपने ज़माने के बड़े पढ़े

मुबारक हो लड़की हुई है

नर्स ने बाहर आकर जैसे ही यह खबर सुनाई राजन सहम गया, अनायास ही मुख से निकल पड़ा, हे ईश्वर ! क्यों भेजा इस मासूम को इस दानवी समाज में अपने पास ही सुरक्षित रखते हरि, अपनी बिटिया को।  यह सिर्फ एक घर की बात नहीँ, आज हर एक लड़की के माता-पिता दहशत में

तड़फ – हिंदी कविता

ऐसी जन्नत की भरी, उसनेउड़ान वह , आस-पास सुन्न-मुसाना डाल गई,विचारी वह, सहक गई वक्त की,मारी वह। डाल गई माथे पर तिऊड़ी,कुँआरी वह, गुलाब की कली की अपेक्षा से अधिक,थी जो प्यारी वह।‘याद’ रंग रूप जैसे सुंदर, सुनाअरीं वह, लाजवंती के साथ तुलना करूँ, मैं उसकी,दिखाती थी ऐसी, उसकी समझदारी वह,साथ छोड़ गई मेरा,

नन्हीं बच्ची – हिंदी कविता

भारत जैसे देश में जहाँ नारी को पवित्र स्थान प्राप्त है वहां नन्हीं सुकुमारियों के प्रति बढ़ते जघन्य अपराध न सिर्फ देश की संस्कृति को धूमिल कर रहे हैं बल्कि यह भी दर्शा रहे हैं कि आज का आधुनिक मानव वैचारिक रूप से कितना घृणित हो चुका है। न्यायालयों में बैठे, काले कोट धारण

इन वजहों से स्मार्टफोन हो जाते हैं जल्दी खराब

आज के समय में Smartphone हर किसी के हाथ की शोभा बना हुआ है। स्मार्टफोन आज के समय में हर किसी के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। आज फोन सिर्फ बात करने का एक जरिया नहीं रह गया है अपितु Entertainment के अलावा अन्य जरूरी कार्यों के लिए भी लोग स्मार्टफोन पर